1 याहवेह, मैंने आप पर
2 मेरे परमेश्वर, मैंने आप पर भरोसा किया है;
3 कोई भी, जिसने आप पर अपनी आशा रखी है
4 याहवेह, मुझे अपने मार्ग दिखा,
5 अपने सत्य की ओर मेरी अगुवाई कीजिए और मुझे शिक्षा दीजिए,
6 याहवेह, अपनी असीम दया तथा अपने करुणा-प्रेम का स्मरण कीजिए,
7 युवावस्था में किए गए मेरे अपराधों का
8 याहवेह भले एवं सत्य हैं,
9 विनीत को वह धर्ममय मार्ग पर ले चलते हैं,
10 जो याहवेह की वाचा एवं व्यवस्था का पालन करते हैं,
11 याहवेह, अपनी महिमा के निमित्त,
12 तब कौन है वह मनुष्य, जो याहवेह से डरता है?
13 तब समृद्ध होगा उसका जीवन,
14 अपने श्रद्धालुओं पर ही याहवेह अपने रहस्य प्रकाशित करते हैं;
15 मेरी आंखें एकटक याहवेह को देख रहीं हैं,
16 हे याहवेह, मेरी ओर मुड़कर मुझ पर कृपादृष्टि कीजिए,
17 मेरे हृदय का संताप बढ़ गया है,
18 मेरी पीड़ा और यातना पर दृष्टि कीजिए,
19 देखिए, मेरे शत्रुओं की संख्या कितनी बड़ी है,
20 मेरे जीवन की रक्षा कीजिए और मुझे बचा लीजिए;
21 खराई तथा सच्चाई मुझे सुरक्षित रखें,
22 हे परमेश्वर, इस्राएल को बचा लीजिए,