1 पृथ्वी और पृथ्वी में जो कुछ भी है, सभी कुछ याहवेह का ही है.
2 क्योंकि उन्हीं ने महासागर पर इसकी नींव रखी
3 कौन चढ़ सकेगा याहवेह के पर्वत पर?
4 वही, जिसके हाथ निर्मल और हृदय शुद्ध है,
5 उस पर याहवेह की आशीष स्थायी रहेगी.
6 यही है वह पीढ़ी, जो याहवेह की कृपादृष्टि खोजने वाली,
7 प्रवेश द्वारो, ऊंचे करो अपने मस्तक;
8 यह महातेजस्वी राजा हैं कौन?
9 प्रवेश द्वारों, ऊंचा करो अपने मस्तक;
10 यह महातेजस्वी राजा कौन है?