1 यह याहवेह की वाणी है:
2 मैं विदेशियों को बाबेल की ओर भेजूंगा,
3 वह, जो धनुर्धारी है, उसे न तो धनुष तानने दो,
4 वे कसदियों के देश में पृथ्वीशायी हो जाएंगे,
5 क्योंकि न तो इस्राएल और न यहूदिया को उनके परमेश्वर,
6 “बाबेल के मध्य से पलायन करो!
7 बाबेल याहवेह के हाथ में स्वर्ण कटोरा समान रहा है;
8 सहसा बाबेल का पतन हो गया है और वह चूर-चूर हो गया है.
9 “ ‘हमने बाबेल का उपचार करना चाहा,
10 “ ‘याहवेह ने हमें निस्सहाय घोषित किया है;
11 “बाणों की नोक की धार बना लो,
12 बाबेल शहरपनाह पर आक्रमण के लिए संकेत झंडा ऊंचा उठाओ!
13 तुम, जो महानद के निकट निवास करते हो,
14 सेनाओं के याहवेह ने अपनी ही जीवन की शपथ खायी है: निस्संदेह,
15 “याहवेह ही हैं जिन्होंने अपने सामर्थ्य से पृथ्वी की सृष्टि की;
16 उनके नाद उच्चारण से आकाश के जल में हलचल मच जाती है;
17 “हर एक मनुष्य मूर्ख है—ज्ञानहीन;
18 ये प्रतिमाएं सर्वथा व्यर्थ हैं, ये हास्यपद कृति हैं;
19 याहवेह, जो याकोब की निधि हैं, इनके सदृश नहीं हैं,
20 “उनका आश्वासन है,
21 तुमसे मैं घोड़े तथा उसके सवार को नष्ट कर देता हूं,
22 तुमसे मैं पुरुष तथा स्त्री को नष्ट कर देता हूं,
23 तुमसे मैं चरवाहे एवं भेड़-बकरियों को नष्ट करता हूं,
24 “किंतु मैं तुम्हारी आंखों ही के समक्ष बाबेल तथा सारे कसदियावासियों से उनके द्वारा ज़ियोन में किए गए उनके सारे अधर्म का बदला लूंगा,” यह याहवेह की वाणी है.
25 “तुम यह समझ लो, विनाशक पर्वत, मैं तुम्हारे विरुद्ध हूं,
26 तुममें से वे भवन के लिए कोने की शिला तक न निकालेंगे
27 “सारे देश में चेतावनी का झंडा ऊंचा किया जाए!
28 राष्ट्रों को उसके विरुद्ध युद्ध के लिए नियुक्त करो—
29 पृथ्वी कंपित होती तथा वेदना में ऐंठ रही है,
30 बाबेल के शूर योद्धाओं ने समर्पण कर दिया है;
31 एक समाचार का प्रेषक दौड़कर अन्य से मिलता है
32 घाटों पर शत्रु का अधिकार हो चुका है,
33 सेनाओं के याहवेह, इस्राएल के परमेश्वर की वाणी यह है:
34 ज़ियोनवासी कहेंगे, “बाबेल के राजा नबूकदनेज्ज़र ने तो मुझे ग्रसित कर लिया है,
35 वह हिंसा, जो बाबेल द्वारा मुझ पर तथा मेरी देह पर की गई थी,”
36 इसलिये याहवेह की वाणी यह है:
37 बाबेल खंडहरों का ढेर,
38 बाबेलवासी सशक्त सिंहों के समान दहाड़ेंगे,
39 जब वे उतावला होंगे,
40 “मैं उनकी स्थिति वध के लिए
41 “कैसे शेशाख को बंदी बना लिया गया है,
42 समुद्र जल स्तर ऊंचा होकर बाबेल तक पहुंच गया है;
43 उसके नगर भयास्पद हो गए हैं,
44 मैं बाबेल में ही बेल को दंड दूंगा,
45 “मेरी प्रजाजनो, वहां से निकल आओ!
46 तुम्हारा हृदय मूर्छित न होने लगे
47 तब तुम यह देख लेना वे दिन आ रहे हैं,
48 तब स्वर्ग और पृथ्वी तथा इनके सारे निवासी
49 “इस्राएल के लोगों के कारण बाबेल का पतन अनिवार्य है,
50 तुम सभी, जो तलवार से बच निकले हो,
51 “निंदा सुनकर हम अत्यंत लज्जित हुए हैं
52 “तब यह समझ लो: वे दिन आ रहे हैं,” यह याहवेह की वाणी है,
53 चाहे बाबेल आकाश-सदृश ऊंचा हो जाए,
54 “बाबेल में विलाप व्याप्त है,
55 क्योंकि याहवेह बाबेल के विनाश के लिए तैयार हैं;
56 बाबेल पर विनाशक ने आक्रमण किया है;
57 मैं उसके उच्चाधिकारी तथा परामर्शकों को मदोन्मत बना दूंगा,
58 सेनाओं के याहवेह का संदेश यह है:
59 नेरियाह के पुत्र माहसेइयाह के पौत्र सेराइयाह को दिया गया भविष्यद्वक्ता येरेमियाह का आदेश यह है, यह उसे उस अवसर पर भेजा गया, जब वह यहूदिया के राजा सीदकियाहू के राज्य-काल के चौथे वर्ष में राजा के साथ बाबेल गया था, सेराइयाह वहां महलों का प्रबंधक था.
60 येरेमियाह ने एक चर्म कुण्डलिका में उन सारे संकटों की एक सूची बना दी जो बाबेल के लिए निर्धारित किए गए थे, अर्थात् वे सभी भविष्यवाणी, जो बाबेल के विषय में की गई थी.
61 तत्पश्चात येरेमियाह ने सेराइयाह को संबोधित कर कहा, “यह ध्यान रखना कि बाबेल पहुंचते ही तुम यह सब उच्च स्वर में सबके समक्ष पढ़ोगे.
62 फिर तुम यह भी कहना, ‘याहवेह ने इस स्थान के विषय में भविष्यवाणी की है, कि यह स्थान नष्ट कर दिया जाएगा, इस प्रकार कि इस स्थान पर कोई भी निवासी शेष न रह जाएगा; चाहे मनुष्य हो अथवा पशु और यह स्थायी उजाड़ हो जाएगा.’
63 जैसे ही तुम इस चर्म कुण्डली को पढ़ना समाप्त करोगे, तुम एक पत्थर इसमें बांध देना और इसे फरात नदी के मध्य में फेंक देना.
64 उसे फेंकते हुए तुम यह कहना, ‘बाबेल इसी प्रकार डूब जाएगा और फिर कभी उठकर ऊपर न आएगा, क्योंकि मैं उस पर ऐसा संकट डालने पर हूं. और उसके लोग गिर जाएंगे.’ ”