1 अम्मोन वंशजों के संबंध में:
2 इसलिये यह देखना कि ऐसे दिन आ रहे हैं,
3 “हेशबोन, विलाप करो, क्योंकि अय नगर नष्ट हो चुका है!
4 तुम अपनी घाटियों के विषय में कितना अहंकार कर रही हो,
5 यह देख लेना, मैं तुम पर आतंक लाने पर हूं
6 “किंतु तत्पश्चात मैं अम्मोन वंशजों की समृद्धि पुनःस्थापित कर दूंगा,”
7 एदोम के विषय में:
8 देदान वासियों, पीछे मुड़कर भाग जाओ
9 यदि द्राक्षा तोड़नेवाले तुम्हारे निकट आएं,
10 किंतु मैंने तो एसाव को विवस्त्र कर दिया है;
11 ‘अपने पितृहीनों को यहीं छोड़ दो; मैं उन्हें जीवित रखूंगा.
12 क्योंकि याहवेह की वाणी यह है: “यह देखना, जिन्हें उस प्याले से पीने का दंड नहीं दिया गया था, निश्चयतः उससे पिएंगे और क्या तुम वह हो, जिसे पूर्णतः सहायकमुक्त छोड़ दिया जाएगा? नहीं तुम्हें सहायकमुक्त नहीं छोड़ा जाएगा, किंतु तुम निश्चयतः उस प्याले में से पियोगे.
13 क्योंकि मैंने स्वयं अपनी ही शपथ ली है,” यह याहवेह ही की वाणी है, “कि बोज़राह आतंक का, घृणा का, विध्वंस का तथा शाप का साधन बन जाएगा, इसके सभी नगर स्थायी खंडहर बनकर रह जाएंगे.”
14 याहवेह द्वारा प्रगट एक संदेश मैंने सुना है;
15 “क्योंकि तब तुम्हें बोध होगा, कि मैंने तुम्हें राष्ट्रों के मध्य लघु बना दिया है,
16 तुम, जो चट्टानों के मध्य निवास करते हो,
17 “एदोम भय का विषय हो जाएगा;
18 सोदोम, अमोराह
19 “यह देखना, यरदन की झाड़ियों में से कोई सिंह सदृश निकलकर
20 इसलिये अब याहवेह की उस योजना को समझ लो, जो उन्होंने एदोम के प्रति योजित की है,
21 उनके पतन की ध्वनि के कारण पृथ्वी कांप उठी है;
22 यह देख लेना कि याहवेह ऊंचे उड़कर गरुड़-सदृश झपट्टा मारेंगे,
23 दमेशेक के विषय में:
24 दमेशेक अब निस्सहाय रह गया है,
25 प्रख्यात नगर कैसे परित्यक्त नहीं छोड़ा गया,
26 उस नगर के जवान उसकी सड़कों पर पृथ्वी पर गिरे हुए पाए जाएंगे;
27 “मैं दमेशेक की शहरपनाहें भस्म कर दूंगा;
28 बाबेल के राजा नबूकदनेज्ज़र द्वारा पराजय: केदार, तथा हाज़ोर के राज्यों के विषय में याहवेह की वाणी यह है:
29 वे अपने शिविर तथा अपनी भेड़-बकरियां अपने साथ ले जाएंगे;
30 “भागो दूर चले जाओ!
31 “उठकर ऐसे देश पर आक्रमण करो,
32 उनके ऊंट लूट सामग्री हो जाएंगे,
33 “हाज़ोर सियारों का बसेरा बन जाएगा,
34 वह संदेश, जो याहवेह की ओर से भविष्यद्वक्ता येरेमियाह को एलाम के संबंध में यहूदिया के राजा सीदकियाहू के राज्य-काल के प्रारंभ में भेजा गया, यह है:
35 सेनाओं के याहवेह की वाणी यह है:
36 आकाश की चारों दिशाओं से
37 इस रीति से मैं एलाम को उसके शत्रुओं के समक्ष तितर-बितर कर दूंगा,
38 तब मैं एलाम में अपना सिंहासन प्रतिष्ठित करूंगा,
39 “किंतु होगा यह,