1 यह याहवेह की वाणी है,
2 अपने तंबू के पर्दों को फैला दो,
3 क्योंकि अब तुम दाएं तथा बाएं दोनों ही ओर को बढ़ाओगे;
4 “मत डर; क्योंकि तुम्हें लज्जित नहीं होना पड़ेगा.
5 क्योंकि तुम्हें रचनेवाला तुम्हारा पति है—
6 क्योंकि याहवेह ने तुम्हें बुलाया है
7 “कुछ पल के लिए ही मैंने तुझे छोड़ा था,
8 कुछ ही क्षणों के लिए
9 “क्योंकि मेरी दृष्टि में तो यह सब नोहा के समय जैसा है,
10 चाहे पहाड़ हट जाएं
11 “हे दुखियारी, तू जो आंधी से सताई है और जिसको शांति नहीं मिली,
12 और मैं तुम्हारे शिखरों को मूंगों से,
13 वे याहवेह द्वारा सिखाए हुए होंगे,
14 तू धार्मिकता के द्वारा स्थिर रहेगी:
15 यदि कोई तुम पर हमला करे, तो याद रखना वह मेरी ओर से न होगा;
16 “सुन, लोहार कोयले की आग में
17 कोई भी हथियार ऐसा नहीं बनाया गया, जो तुम्हें नुकसान पहुंचा सके,