Salmos 90

HIN2010

1 हे स्वामी, तू अनादि काल से हमारा घर (सुरक्षास्थल) रहा है।

2 हे परमेश्वर, तू पर्वतों से पहले, धरती से पहले था,

3 तू ही इस जगत में लोगों को लाता है।

4 तेरे लिये हजार वर्ष बीते हुए कल जैसे है,

5 तू हमारा जीवन सपने जैसा बुहार देता है और सुबह होते ही हम चले जाते है।

6 जो सुबह उगती है और वह शाम को सूख कर मुरझा जाती है।

7 हे परमेश्वर, जब तू कुपित होता है हम नष्ट हो जाते हैं।

8 तू हमारे सब पापों को जानता है।

9 तेरा क्रोध हमारे जीवन को खत्म कर सकता है।

10 हम सत्तर साल तक जीवित रह सकते हैं।

11 हे परमेश्वर, सचमुच कोई भी व्यक्ति तेरे क्रोध की पूरी शक्ति नहीं जानता।

12 तू हमको सिखा दे कि हम सचमुच यह जाने कि हमारा जीवन कितना छोटा है।

13 हे यहोवा, तू सदा हमारे पास लौट आ।

14 प्रति दिन सुबह हमें अपने प्रेम से परिपूर्ण कर,

15 तूने हमारे जीवनों में हमें बहुत पीड़ा और यातना दी है, अब हमें प्रसन्न कर दे।

16 तेरे दासों को उन अद्भुत बातों को देखने दे जिनको तू उनके लिये कर सकता है,

17 हमारे परमेश्वर, हमारे स्वमी, हम पर कृपालु हो।

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