1 हे यहोवा, तू अपने देश पर कृपालु हो।
2 हे यहोवा, अपने भक्तों के पापों को क्षमा कर।
3 हे यहोवा, कुपित होना त्याग।
4 हमारे परमेश्वर, हमारे संरक्षक, हम पर तू कुपित होना छोड़ दे
5 क्या तू सदा के लिये हमसे कुपित रहेगा
6 कृपा करके हमको फिर जिला दे!
7 हे यहोवा, तू हमें दिखा दे कि तू हमसे प्रेम करता है।
8 जो परमेश्वर ने कहा, मैंने उस पर कान दिया।
9 परमेश्वर शीघ्र अपने अनुयायियों को बचाएगा।
10 परमेश्वर का सच्चा प्रेम उनके अनुयायियों को मिलेगा।
11 धरती पर बसे लोग परमेश्वर पर विश्वास करेंगे,
12 यहोवा हमें बहुत सी उत्तम वस्तुएँ देगा।
13 परमेश्वर के आगे आगे नेकी चलेगी,