1 मेरे भक्तों, तुम मेरे उपदेशों को सुनो।
2 मैं तुम्हें यह कथा सुनाऊँगा।
3 हमने यह कहानी सुनी है, और इसे भली भाँति जानते हैं।
4 इस कहानी को हम नहीं भूलेंगे।
5 यहोवा ने याकूब से वाचा किया।
6 इस तरह लोग व्यवस्था के विधान को जानेंगे। यहाँ तक कि अन्तिम पीढ़ी तक इसे जानेगी।
7 अत: वे सभी लोग यहोवा पर भरोसा करेंगे।
8 अत: लोग अपनी संतानों को परमेश्वर के आदेशों को सिखायेंगे,
9 एप्रैम के लोगे शस्र धारी थे,
10 उन्होंने जो यहोवा से वाचा किया था पाला नहीं।
11 एप्रैम के वे लोग उन बड़ी बातों को भूल गए जिन्हें परमेश्वर ने किया था।
12 परमेश्वर ने उनके पूर्वजों को मिस्र के सोअन में निज महाशक्ति दिखायी।
13 परमेश्वर ने लाल सागर को चीर कर लोगों को पार उतार दिया।
14 हर दिन उन लोगों को परमेश्वर ने महा बादल के साथ अगुवाई की।
15 परमेश्वर ने मरूस्थल में चट्टान को फाड़ कर गहरे धरती के निचे से जल दिया।
16 परमेश्वर चट्टान से जलधारा वैसे लाया जैसे कोई नदी हो!
17 किन्तु लोग परमेश्वर के विरोध में पाप करते रहे।
18 फिर उन लोगों ने परमेश्वर को परखने का निश्चय किया।
19 परमेश्वर के विरूद्ध वे बतियाने लगे, वे कहने लगे,
20 परमेश्वर ने चट्टान पर चोट की और जल का एक रेला बाहर फूट पड़ा।
21 यहोवा ने सुन लिया जो लोगों ने कहा था।
22 क्यों क्योंकि लोगों ने उस पर भरोसा नहीं रखा था,
25 लोगों ने वह स्वर्गदूत का भोजन खाया।
26 फिर परमेश्वर ने पूर्व से तीव्र पवन चलाई
27 तिमान की दिशा से परमेश्वर की महाशक्ति ने एक आँधी उठायी और नीला आकाश काला हो गया
28 वे पक्षी ठीक डेरे के बीच में गिरे थे।
29 उनके पास खाने को भरपूर हो गया,
30 उन्होंने अपनी भूख पर लगाम नहीं लगायी।
31 सो उन लोगों पर परमेश्वर अति कुपीत हुआ और उनमें से बहुतों को मार दिया।
32 फिर भी लोग पाप करते रहे!
33 सो परमेश्वर ने उनके व्यर्थ जीवन को
34 जब कभी परमेश्वर ने उनमें से किसी को मारा, वे बाकि परमेश्वर की ओर लौटने लगे।
35 वे लोग याद करेंगे कि परमेश्वर उनकी चट्टान रहा था।
36 वैसे तो उन्होंने कहा था कि वे उससे प्रेम रखते हैं।
37 वे सचमुच मन से परमेश्वर के साथ नहीं थे।
38 किन्तु परमेश्वर करूणापूर्ण था।
39 परमेश्वर को याद रहा कि वे मात्र मनुष्य हैं।
40 हाय, उन लोगों ने मरूभूमि में परमेश्वर को कष्ट दिया!
41 परमेश्वर के धैर्य को उन लोगों ने फिर परखा,
42 वे लोग परमेश्वर की शक्ति को भूल गये।
43 वे लोग मिस्र की अद्भुत बातों को
44 उनकी नदियों को परमेश्वर ने खून में बदल दिया था!
45 परमेश्वर ने भिड़ों के झुण्ड भेजे थे जिन्होंने मिस्र के लोगों को डसा।
46 परमेश्वर ने उनके फसलों को टिड्डों को दे डाला।
47 परमेश्वर ने मिस्रियों के अंगूर के बाग ओलों से नष्ट किये,
48 परमेश्वर ने उनके पशु ओलों से मार दिये
49 परमेश्वर ने मिस्र के लोगों को अपना प्रचण्ड क्रोध दिखाया।
50 परमेश्वर ने क्रोध प्रकट करने के लिये एक राह पायी।
51 परमेश्वर ने मिस्र के हर पहले पुत्र को मार डाला।
52 फिर उसने इस्राएल की चरवाहे के समान अगुवाई की।
53 वह अपनेनिज लोगों को सुरक्षा के साथ ले चला।
54 परमेश्वर अपने निज भक्तों को अपनी पवित्र धरती पर ले आया।
55 परमेश्वर ने दूसरी जातियों को वह भूमि छोड़ने को विवश किया।
56 इतना होने पर भी इस्राएल के लोगों ने परम परमेश्वर को परखा और उसको बहुत दु:खी किया।
57 इस्राएल के लोग परमेश्वर से भटक कर विमुख हो गये थे।
58 इस्राएल के लोगों ने ऊँचे पूजा स्थल बनाये और परमेश्वर को कुपित किया।
59 परमेश्वर ने यह सुना और बहुत कुपित हुआ।
60 परमेश्वर ने शिलोह के पवित्र तम्बू को त्याग दिया।
61 फिर परमेश्वर ने उसके निज लोगों को दूसरी जातियों को बंदी बनाने दिया।
62 परमेश्वर ने अपने ही लोगों (इस्राएली) पर निज क्रोध प्रकट किया।
63 उनके युवक जलकर राख हुए,
64 याजक मार डाले गए,
65 अंत में, हमारा स्वामी उठ बैठा
66 फिर तो परमेश्वर ने अपने शत्रुओं को मारकर भगा दिया और उन्हें पराजित किया।
67 किन्तु परमेश्वर ने यूसुफ के घराने को त्याग दिया।
68 परमेश्वर ने यहूदा के गोत्र को नहीं चुना
69 उस ऊँचे पर्वत पर परमेश्वर ने अपना पवित्र मन्दिर बनाया।
70 परमेश्वर ने दाऊद को अपना विशेष सेवक बनाने में चुना।
71 परमेश्वर दाऊद को भेड़ों को रखवाली से ले आया
72 और फिर पवित्र मन से दाऊद ने इस्राएल के लोगों की अगुवाई की।