1 हे परमेश्वर, तूने हमको बिसरा दिया।
2 तूने धरती कँपाई और उसे फाड़ दिया।
3 तूने अपने लोगों को बहुत यातनाएँ दी है।
4 तूने उन लोगों को ऐसे चिताया, जो तुझको पूजते हैं।
5 तू अपने महाशक्ति का प्रयोग करके हमको बचा ले!
6 परमेश्वर ने अपने मन्दिर में कहा:
7 गिलाद और मनश्शे मेरे बनेंगे।
8 मैं मोआब को ऐसा बनाऊँगा, जैसा कोई मेरे चरण धोने का पात्र।
11 हे परमेश्वर, तू ही हमको इस संकट की भूमि से उबार सकता है!
12 किन्तु हमें परमेश्वर ही मजबूत बना सकता है।