1 हे परमेश्वर, मुझ पर करूणा कर क्योंकि लोगों ने मुझ पर वार किया है।
2 मेरे शत्रु सारे दिन मुझ पर वार करते रहे।
3 जब भी डरता हूँ,
4 मैं परमेश्वर के भरोसे हूँ, सो मैं भयभीत नहीं हूँ। लोग मुझको हानि नहीं पहुँचा सकते!
5 मेरे शत्रु सदा मेरे शब्दों को तोड़ते मरोड़ते रहते हैं।
6 वे आपस में मिलकर और लुक छिपकर मेरी हर बात की टोह लेते हैं।
7 हे परमेश्वर, उन्हें बचकर निकलने मत दे।
8 तू यह जानता है कि मैं बहुत व्याकुल हूँ।
9 सो अब मैं तुझे सहायता पाने को पुकारुँगा।
10 मैं परमेश्वर का गुण उसके वचनों के लिए गाता हूँ।
11 मुझको परमेश्वर पर भरोसा है, इसलिए मैं नहीं डरता हूँ।
12 हे परमेश्वर, मैंने जो तेरी मन्नतें मानी है, मैं उनको पूरा करुँगा।
13 क्योंकि तूने मुझको मृत्यु से बचाया है।