Salmos 52

HIN2010

1 अरे ओ, बड़े व्यक्ति।

2 तू मूढ़ता भरी कुचक्र रचता रहता है। तेरी जीभ वैसी ही भयानक है, जैसा तेज उस्तरा होता है।

3 तुझको नेकी से अधिक बदी भाती है।

4 तुझको और तेरी झूठी जीभ को, लोगों को हानि पहुँचाना अच्छा लगता है।

5 तुझे परमेश्वर सदा के लिए नष्ट कर देगा।

6 सज्जन इसे देखेंगे

7 “देखो उस व्यक्ति के साथ क्या हुआ जो यहोवा पर निर्भर नहीं था।

8 किन्तु मैं परमेश्वर के मन्दिर में एक हरे जैतून के वूक्ष सा हूँ।

9 हे परमेश्वर, मैं उन कामों के लिए जिनको तूने किया, स्तुति करता हूँ।

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