Salmos 33

HIN2010

1 हे सज्जन लोगों, यहोवा में आनन्द मनाओ!

2 वीणा बजाओ और उसकी स्तुति करो!

3 अब उसके लिये नया गीत गाओ।

4 परमेश्वर का वचन सत्य है।

5 नेकी और निष्पक्षता परमेश्वर को भाती है।

6 यहोवा ने आदेश दिया और सृष्टि तुरंत अस्तित्व में आई।

7 परमेश्वर ने सागर में एक ही स्थान पर जल समेटा।

8 धरती के हर मनुष्य को यहोवा का आदर करना और डरना चाहिए।

9 क्योंकि परमेश्वर को केवल बात भर कहनी है, और वह बात तुरंत घट जाती है।

10 परमेश्वर चाहे तो सभी सुझाव व्यर्थ करे।

11 किन्तुयहोवा के उपदेश सदा ही खरे होते है।

12 धन्य हैं वे मनुष्य जिनका परमेश्वर यहोवा है।

13 यहोवा स्वर्ग से नीचे देखता रहता है।

14 वह ऊपर ऊँचे पर संस्थापित आसन से

15 परमेश्वर ने हर किसी का मन रचा है।

16 राजा की रक्षा उसके महाबल से नहीं होती है,

17 युद्ध में सचमुच अश्वबल विजय नहीं देता।

18 जो जन यहोवा का अनुसरण करते हैं, उन्हें यहोवा देखता है और रखवाली करता है।

19 उन लोगों को मृत्यु से बचाता है।

20 इसलिए हम यहोवा की बाट जोहेंगे।

21 परमेश्वर मुझको आनन्दित करता है।

22 हे यहोवा, हम सचमुच तेरी आराधना करते हैं!

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