Salmos 19

HIN2010

1 अम्बर परमेश्वर की महिमा बखानतें हैं,

2 हर नया दिन उसकी नयी कथा कहता है,

3 न तो कोई बोली है, और न तो कोई भाषा,

4 उसकी “वाणी” भूपण्डल में व्यापती है

5 सूर्य प्रफुल्ल हुए दुल्हे सा अपने शयनकक्षा से निकलता है।

6 अम्बर के एक छोर से सूर्य चल पड़ता है

7 यहोवा की शिक्षायें सम्पूर्ण होती हैं,

8 यहोवा के नियम न्यायपूर्ण होते हैं,

9 यहोवा की आराधना प्रकाश जैसी होती है,

10 यहोवा के उपदेश उत्तम स्वर्ण और कुन्दन से भी बढ़ कर मनोहर है।

11 हे यहोवा, तेरे उपदेश तेरे सेवक को आगाह करते है,

12 हे यहोवा, अपने सभी दोषों को कोई नहीं देख पाता है।

13 हे यहोवा, मुझे उन पापों को करने से बचा जिन्हें मैं करना चाहता हूँ।

14 मुझको आशा है कि, मेरे वचन और चिंतन तुझको प्रसन्न करेंगे।

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