Salmos 18

HIN2010

1 उसने कहा, “यहोवा मेरी शक्ति है,

2 यहोवा मेरी चट्टान, मेरा गढ़, मेरा शरणस्थल है।”

3 यहोवा को जो स्तुति के योग्य है,

4 मेरे शत्रुओं ने मुझे मारने का यत्न किया। मैं चारों ओर मृत्यु की रस्सियों से घिरा हूँ!

5 मेरे चारों ओर पाताल की रस्सियाँ थी।

6 मैं घिरा हुआ था और यहोवा को सहायता के लिये पुकारा।

7 तब पृथ्वी हिल गई और काँप उठी;

8 परमेश्वर के नथनों से धुँआ निकल पड़ा।

9 यहोवा स्वर्ग को चीर कर नीचे उतरा!

10 उसने उड़ते करुब स्वर्गदूतों पर सवारी की वायु पर सवार हो

11 यहोवा ने स्वयं को अँधेरे में छिपा लिया, उसको अम्बर का चँदोबा घिरा था।

12 परमेश्वर का तेज बादल चीर कर निकला।

13 यहोवा का उद्घोष नाद अम्बर में गूँजा!

14 यहोवा ने बाण छोड़े और शत्रु बिखर गये।

15 हे यहोवा, तूने गर्जना की

16 यहोवा ऊपर अम्बर से नीचे उतरा और मेरी रक्षा की।

17 मेरे शत्रु मुझसे कहीं अधिक सशक्त थे।

18 जब मैं विपत्ति में था, मेरे शत्रुओं ने मुझ पर प्रहार किया

19 यहोवा को मुझसे प्रेम था, सो उसने मुझे बचाया

20 मैं अबोध हूँ, सो यहोवा मुझे बचायेगा।

21 क्योंकि मैंने यहोवा की आज्ञा पालन किया!

22 मैं तो यहोवा के व्यवस्था विधानों को

23 स्वयं को मैं उसके सामने पवित्र रखता हूँ

24 क्योंकि मैं अबोध हूँ! इसलिये मुझे मेरा पुरस्कार देगा!

25 हे यहोवा, तू विश्वसनीय लोगों के साथ विश्वसनीय

26 हे यहोवा शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता है, और टेढ़ों के साथ तू तिछर्ा बनता है।

27 हे यहोवा, तू नम्र जनों के लिये सहाय है,

28 हे यहोवा, तू मेरा जलता दीप है।

29 हे यहोवा, तेरी सहायता से, मैं सैनिकों के साथ दौड़ सकता हूँ।

30 परमेश्वर के विधान पवित्र और उत्तम हैं और यहोवा के शब्द सत्यपूर्ण होते हैं।

31 यहोवा को छोड़ बस और कौन परमेश्वर है

32 मुझको परमेश्वर शक्ति देता है।

33 परमेश्वर मेरे चरणों को हिरण की सी तीव्र गति देता है।

34 हे यहोवा, मुझको सिखा कि युद्ध मैं कैसे लडूँ

35 हे परमेश्वर, अपनी ढाल से मेरी रक्षा कर।

36 हे परमेश्वर, तू मेरे पाँवों को और टखनों को दृढ़ बना

37 फिर अपने शत्रुओं का पीछा करुँ, और उन्हें पकड़ सकूँ।

38 मैं अपने शत्रुओं को पराजित करुँगा।

39 हे परमेश्वर, तूने मुझे युद्ध में शक्ति दी,

40 तूने मेरे शत्रुओं की पीठ मेरी ओर फेर दी,

41 जब मेरे बैरियों ने सहायता को पुकारा, q

42 मैं अपने शत्रुओं को कूट कूट कर धूल में मिला दूँगा, जिसे पवन उड़ा देती है।

43 मुझे उनसे बचा ले जो मुझसे युद्ध करते हैं।

44 फिर वे लोग मेरी सुनेंगे और मेरे आदेशों को पालेंगे, q

45 वे विदेशी लोग मेरे सामने झुकेंगे क्योंकि वे मुझसे भयभीत होंगे।

46 यहोवा सजीव है!

47 धन्य है, मेरा पलटा लेने वाला परमेश्वर

48 यहोवा, तूने मुझे शत्रुओं से छुड़ाया है।

49 हे यहोवा, इसी कारण मैं देशों के बीच तेरी स्तुति करता हूँ।

50 यहोवा अपने राजा की सहायता बहुत से युद्धों को जीतने में करता है!

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