1 पूरे जीवन भर मेरे अनेक शत्रु रहे हैं।
2 सारे जीवन भर मेरे अनेक शत्रु रहे हैं।
3 उन्होंने मुझे तब तक पीटा जब तक मेरी पीठ पर गहरे घाव नहीं बने।
4 किन्तु भले यहोवा ने रस्से काट दिये
5 जो सिय्योन से बैर रखते थे, वे लोग पराजित हुए।
6 वे लोग ऐसे थे, जैसे किसी घरकी छत पर की घास
7 उस घास से कोई श्रमिक अपनी मुट्ठी तक नहीं भर पाता
8 ऐसे उन दुष्टों के पास से जो लोग गुजरते हैं।