Salmos 129

HIN2010

1 पूरे जीवन भर मेरे अनेक शत्रु रहे हैं।

2 सारे जीवन भर मेरे अनेक शत्रु रहे हैं।

3 उन्होंने मुझे तब तक पीटा जब तक मेरी पीठ पर गहरे घाव नहीं बने।

4 किन्तु भले यहोवा ने रस्से काट दिये

5 जो सिय्योन से बैर रखते थे, वे लोग पराजित हुए।

6 वे लोग ऐसे थे, जैसे किसी घरकी छत पर की घास

7 उस घास से कोई श्रमिक अपनी मुट्ठी तक नहीं भर पाता

8 ऐसे उन दुष्टों के पास से जो लोग गुजरते हैं।

Ler em outra tradução

Comparar lado a lado