1 जो लोग पवित्र जीवन जीते हैं, वे प्रसन्न रहते हैं।
2 लोग जो यहोवा की विधान पर चलते हैं, वे प्रसन्न रहते हैं।
3 वे लोग बुरे काम नहीं करते।
4 हे यहोवा, तूने हमें अपने आदेश दिये,
5 हे यहोवा, यादि मैं सदा
6 जब मैं तेरे आदेशों को विचारूँगा
7 जब मैं तेरे खरेपन और तेरी नेकी को विचारता हूँ
8 हे यहोवा, मैं तेरे आदेशों का पालन करूँगा।
9 एक युवा व्यक्ति कैसे अपना जीवन पवित्र रख पाये
10 मैं अपने पूर्ण मन से परमेश्वर कि सेवा का जतन करता हूँ।
11 मैं बड़े ध्यान से तेरे आदेशों का मनन किया करता हूँ।
12 हे यहोवा, तेरा धन्यवाद!
13 तेरे सभी निर्णय जो विवेकपूर्ण हैं। मैं उनका बखान करूँगा।
14 तेरे नियमों पर मनन करना,
15 मैं तेरे नियमों की चर्चा करता हूँ,
16 मैं तेरे नियमों में आनन्द लेता हूँ।
17 तेरे दास को योग्यता दे
18 हे यहोवा, मेरी आँख खोल दे और मैं तेरी शिक्षाओं के भीतर देखूँगा।
19 मैं इस धरती पर एक अनजाना परदेशी हूँ।
20 मैं हर समय तेरे निर्णयों का
21 हे यहोवा, तू अहंकारी जन की आलोचना करता है।
22 मुझे लज्जित मत होने दे, और मुझको असमंजस में मत डाल।
23 यहाँ तक कि प्रमुखों ने भी मेरे लिये बुरी बातें की हैं।
24 तेरी वाचा मेरा सर्वोत्तम मिस्र है।
25 मैं शीघ्र मर जाऊँगा।
26 मैंने तुझे अपने जीवन के बारे में बताया है, तूने मुझे उत्तर दिया है।
27 हे यहोवा, मेरी सहायता कर ताकि मैं तेरी व्यवस्था का विधान समझूँ।
28 मैं दु:खी और थका हूँ।
29 हे यहोवा, मुझे कोई झूठ मत जीने दे।
30 हे यहोवा, मैंने चुना है कि तेरे प्रति निष्ठावान रहूँ।
31 हे यहोवा, तेरी वाचा के संग मेरी लगन लगी है।
32 मैं तेरे आदेशों का पालन प्रसन्नता के संग किया करूँगा।
33 हे यहोवा, तू मुझे अपनी व्यवस्था सिखा
34 मुझको सहारा दे कि मैं उनको समझूँ
35 हे यहोवा, तू मुझको अपने आदेशों की राह पर ले चल।
36 मेरी सहायता कर कि मैं तेरे वाचा का मनन करूँ,
37 हे यहोवा, मुझे अद्भुत वस्तुओं पाने को
38 हे यहोवा, मैं तेरा दास हूँ। सो उन बातों को कर जिनका वचन तूने दिये है।
39 हे यहोवा, जिस लाज से मुझको भय उसको तू दूर कर दे।
40 देख मुझको तेरे आदेशोंसे प्रेम है।
41 हे यहोवा, तू सच्चा निज प्रेम मुझ पर प्रकट कर।
42 तब मेरे पास एक उत्तर होगा। उनके लिये जो लोग मेरा अपमान करते हैं।
43 तू अपनी शिक्षाएँ जो भरोसे योग्य है, मुझसे मत छीन।
44 हे यहोवा, मैं तेरी शिक्षाओं का पालन सदा और सदा के लिये करूँगा।
45 सो मैं सुरक्षित जीवन जीऊँगा।
46 यहोवा के वाचा की चर्चा मैं राजाओं के साथ करूँगा
47 हे यहोवा, मुझे तेरी व्यवस्थाओं का मनन भाता है।
48 हे यहोवा, मैं तेरी व्यवस्थाओं के गुण गाता हूँ,
49 हे यहोवा, अपना वचन याद कर जो तूने मुझको दिया।
50 मैं संकट में पड़ा था, और तूने मुझे चैन दिया।
51 लोग जो स्वयं को मुझसे उत्तम सोचते हैं, निरन्तर मेरा अपमान कर रहे हैं,
52 मैं सदा तेरे विवेकपूर्ण निर्णयों का ध्यान करता हूँ।
53 जब मैं ऐसे दुष्ट लोगों को देखता हूँ,
54 तेरी व्यवस्थायें मुझे ऐसी लगती है,
55 हे यहोवा, रात में मैं तेरे नाम का ध्यान
56 इसलिए यह होता है कि मैं सावधानी से तेरे आदेशों को पालता हूँ।
57 हे यहोवा, मैंने तेरे उपदेशों पर चलना निश्चित किया यह मेरा कर्तव्य है।
58 हे यहोवा, मैं पूरी तरह से तुझ पर निर्भर हूँ,
59 मैंने ध्यान से अपनी राह पर मनन किया
60 मैंने बिना देर लगाये तेरे आदेशों पर चलने कि शीघ्रता की।
61 बुरे लोगों के एक दल ने मेरे विषय में बुरी बातें कहीं।
62 तेरे सत निर्णयों का तुझे धन्यवाद देने
63 जो कोई व्यक्ति तेरी उपासना करता मैं उसका मित्र हूँ।
64 हे यहोवा, यह धरती तेरी सत्य करूणा से भरी हुई है।
65 हे यहोवा, तूने अपने दास पर भलाईयाँ की है।
66 हे यहोवा, मुझे ज्ञान दे कि मैं विवेकपूर्ण निर्णय लूँ,
67 संकट में पड़ने से पहले, मैंने बहुत से बुरे काम किये थे।
68 हे परमेश्वर, तू खरा है, और तू खरे काम करता है,
69 कुछ लोग जो सोचते हैं कि वे मुझ से उत्तम हैं, मेरे विषय में बुरी बातें बनाते हैं।
70 वे लोग महा मूर्ख हैं।
71 मेरे लिये संकट अच्छ बन गया था।
72 हे यहोवा, तेरी शिक्षाएँ मेरे लिए भली है।
73 हे यहोवा, तूने मुझे रचा है और निज हाथों से तू मुझे सहारा देता है।
74 हे यहोवा, तेरे भक्त मुझे आदर देते हैं और वे प्रसन्न हैं
75 हे यहोवा, मैं यह जानता हूँ कि तेरे निर्णय खरे हुआ करते हैं।
76 अब, अपने सत्य प्रेम से तू मुझ को चैन दे।
77 हे यहोवा, तू मुझे सुख चैन दे और जीवन दे।
78 उन लोगों को जो सोचा करते है कि वे मुझसे उत्तम हैं, उनको निराश कर दे।
79 अपने भक्तों को मेरे पास लौट आने दे।
80 हे यहोवा, तू मुझको पूरी तरह अपने आदेशों को पालने दे
81 मैं तेरी प्रतिज्ञा में मरने को तत्पर हूँ कि तू मुझको बचायेगा।
82 जिन बातों का तूने वचन दिया था, मैं उनकी बाँट जोहता रहता हूँ। किन्तु मेरी आँखे थकने लगी है।
83 यहाँ तक जब मैं कूड़े के ढेर पर दाखमधु की सूखी मशक सा हूँ,
84 मैं कब तक जीऊँगा हे यहोवा, कब दण्ड देगा
85 कुछ अहंकारी लोग ने अपनी झूठों से मुझ पर प्रहार किया था।
86 हे यहोवा, सब लोग तेरी शिक्षाओं के भरोसे रह सकते हैं।
87 उन झूठे लोगों ने मुझको लगभग नष्ट कर दिया है।
88 हे यहोवा, अपनी सत्य करूणा को मुझ पर प्रकट कर।
89 हे यहोवा, तेरे वचन सदा अचल रहते हैं। स्वर्ग में तेरे वचन सदा अटल रहते हैं।
90 सदा सर्वदा के लिये तू ही सच्चा है।
91 तेरे आदेश से ही अब तक सभी वस्तु स्थिर हैं,
92 यदि तेरी शिक्षाएँ मेरी मित्र जैसी नहीं होती,
93 हे यहोवा, तेरे आदेशों को मैं कभी नहीं भूलूँगा।
94 हे यहोवा, मैं तो तेरा हूँ, मेरी रक्षा कर।
95 दुष्ट जन मेरे विनाश का यतन किया करते हैं,
96 सब कुछ की सीमा है,
97 आ हा, यहोवा तेरी शिक्षाओं से मुझे प्रेम है।
98 हे यहोवा, तेरे आदेशों ने मुझे मेरे शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान बनाया।
99 मैं अपने सब शिक्षाओं से अधिक बुद्धिमान हूँ
100 बुजुर्ग प्रमुखों से भी अधिक समझता हूँ।
101 हे यहोवा, तू मुझे राह में हर कदम बुरे मार्ग से बचाता है,
102 यहोवा, तू मेरा शिक्षक है।
103 तेरे वचन मेरे मुख के भीतर
104 तेरी शिक्षाएँ मुझे बुद्धिमान बनाती है।
105 हे यहोवा, तेरा वचन मेरे पाँव के लिये दीपक
106 तेरे नियम उत्तम हैं।
107 हे यहोवा, बहुत समय तक मैंने दु:ख झेले हैं,
108 हे यहोवा, मेरी विनती को तू स्वीकार कर,
109 मेरा जीवन सदा जोखिम से भरा हुआ है।
110 दुष्ट जन मुझको फँसाने का यत्न करते हैं
111 हे यहोवा, मैं सदा तेरी वाचा का पालन करूँगा।
112 मैं सदा तेरे विधान पर चलने का
113 हे यहोवा, मुझको ऐसे उन लोगों से घृणा है, जो पूरी तरह से तेरे प्रति सच्चे नहीं हैं।
114 मुझको ओट दे और मेरी रक्षा कर।
115 हे यहोवा, दुष्ट मनुष्यों को मेरे पास मत आने दे।
116 हे यहोवा, मुझको ऐसे ही सहारा दे जैसे तूने वचन दिया, और मैं जीवित रहूँगा।
117 हे यहोवा, मुझको सहारा दे कि मेरा उद्धार हो।
118 हे यहोवा, तू हर ऐसे व्यक्ति से विमुख हो जाता है, जो तेरे नियम तोड़ता है।
119 हे यहोवा, तू इस धरती पर दुष्टों के साथ ऐसा बर्ताव करता है जैसे वे कूड़ा हो।
120 हे यहोवा, मैं तुझ से भयभीत हूँ, मैं डरता हूँ,
121 मैंने वे बातें की हैं जो खरी और भली हैं।
122 मुझे वचन दे कि तू मुझे सहारा देगा। मैं तेरा दास हूँ।
123 हे यहोवा, तूने मेरे उद्धार का एक उत्तम वचन दिया था,
124 तू अपना सच्चा प्रेम मुझ पर प्रकट कर। मैं तेरा दास हूँ।
125 मैं तेरा दास हूँ।
126 हे यहोवा, यही समय है तेरे लिये कि तू कुछ कर डाले।
127 हे यहोवा, उत्तम सुवर्ण से भी अधिक
128 तेरे सब आदेशों का बहुत सावधानी से मैं पालन करता हूँ।
129 हे यहोवा, तेरी वाचा बहुत अद्भुत है।
130 कब शुरू करेंगे लोग तेरा वचन समझना यह एक ऐसे प्रकाश सा है जो उन्हें जीवन की खरी राह दिखाया करता है।
131 हे यहोवा, मैं सचमुच तेरे आदेशों का पाठ करना चाहता हूँ।
132 हे परमेश्वर, मेरी ओर दृष्टि कर और मुझ पर दयालु हो।
133 तेरे वचन के अनुसार मेरी अगुवाई कर,
134 हे यहोवा, मुझको उन लोगों से बचा ले जो मुझको दु:ख देते हैं।
135 हे यहोवा, अपने दास को तू अपना ले
136 रो—रो कर आँसुओं की एक नदी मैं बहा चुका हूँ।
137 हे यहोवा, तू भला है
138 वे नियम उत्तम है जो तूने हमें वाचा में दिये।
139 मेरी तीव्र भावनाएँ मुझे शीघ्र ही नष्ट कर देंगी।
140 हे यहोवा, हमारे पास प्रमाण है,
141 मैं एक तुच्छ व्यक्ति हूँ और लोग मेरा आदर नहीं करते हैं।
142 हे यहोवा, तेरी धार्मिकता अनन्त है।
143 मैं संकट में था, और कठिन समय में था।
144 तेरी वाचा नित्य ही उत्तम है।
145 सम्पूर्ण मन से यहोवा मैं तुझको पुकारता हूँ, मुझको उत्तर दे।
146 हे यहोवा, मेरी तुझसे विनती है।
147 यहोवा, मैं तेरी प्रार्थना करने को भोर के तड़के उठा करता हूँ।
148 देर रात तक तेरे वचनों का मनन करते हुए
149 हे यहोवा, तू अपने पूर्ण प्रेम से मुझ पर कान दे।
150 लोग मेरे विरूद्ध कुचक्र रच रहे हैं।
151 हे यहोवा, तू मेरे पास है।
152 तेरी वाचा से बहुत दिनों पहले ही मैं जान गया था
153 हे यहोवा, मेरी यातना देख और मुझको बचा ले,
154 हे यहोवा, मेरे लिये मेरी लड़ाई लड़ और मेरी रक्षा कर।
155 दुष्ट विजयी नहीं होंगे।
156 हे यहोवा, तू बहुत दयालु है।
157 मेरे बहुत से शत्रु है जो मुझे हानि पहुँचाने का जतन करते:
158 मैं उन कृतघ्नों को देख रहा हूँ।
159 देख, तेरे आदेशों का पालन करने का मैं कठिन जतन करता हूँ।
160 हे यहोवा, सनातन काल से तेरे सभी वचन विश्वास योग्य रहे हैं।
161 शक्तिशाली नेता मुझ पर व्यर्थ ही वार करते हैं,
162 हे यहोवा, तेरे वचन मुझ को वैसे आनन्दित करते हैं,
163 मुझे झूठ से बैर है! मैं उससे घृणा करता हूँ!
164 मैं दिन में सात बार तेरे उत्तम विधान के कारण
165 वे व्यक्ति सच्ची शांती पायेंगे, जिन्हें तेरी शिक्षाएँ भाती हैं।
166 हे यहोवा, मैं तेरी प्रतीक्षा में हूँ कि तू मेरा उद्धार करे।
167 मैं तेरी वाचा पर चलता रहा हूँ।
168 मैंने तेरी वाचा का और तेरे आदेशों का पालन किया है।
169 हे यहोवा, सुन तू मेरा प्रसन्न गीत है।
170 हे यहोवा, मेरी विनती सुन।
171 मेरे अन्दर से स्तुति गीत फूट पड़े
172 मुझको सहायता दे कि मैं तेरे वचनों के अनुसार कार्य कर सकूँ, और मुझे तू अपना गीत गाने दे।
173 तू मेरे पास आ, और मुझको सहारा दे
174 हे यहोवा, मैं यह चाहता हूँ कि तू मेरा उद्धार करे,
175 हे यहोवा, मेरा जीवन बना रहे और मैं तेरी स्तुति करूँ।
176 एक भटकी हुई भेड़ सा, मैं इधर—उधर भटका हूँ।