Salmos 115

HIN2010

1 यहोवा! हमको कोई गौरव ग्रहण नहीं करना चाहिये।

2 राष्ट्रों को क्यों अचरज हो कि

3 परमेश्वर स्वर्ग में है।

4 उन जातियों के “देवता” बस केवल पुतले हैं जो सोने चाँदी के बने है।

5 उन पुतलों के मुख है, पर वे बोल नहीं पाते।

6 उनके कान हैं, पर वे सुन नहीं सकते।

7 उनके हाथ हैं, पर वे किसी वस्तु को छू नहीं सकते,

8 जो व्यक्ति इस पुतले को रखते

9 ओ इस्राएल के लोगों, यहोवा में भरोसा रखो!

10 ओ हारुन के घराने, यहोवा में भरोसा रखो!

11 यहोवा की अनुयायिओं, यहोवा में भरोसा रखे!

12 यहोवा हमें याद रखता है।

13 यहोवा अपने अनुयायिओं को, बड़ोंको

14 मुझे आशा है यहोवा तुम्हारी बढ़ोतरी करेगा

15 यहोवा तुझको वरदान दिया करता है!

16 स्वर्ग यहोवा का है।

17 मरे हुए लोग यहोवा का गुण नहीं गाते।

18 किन्तु हम यहोवा का धन्यवाद करते हैं,

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