1 यहोवा ने मेरे स्वामी से कहा,
2 तेरे राज्य के विकास में यहोवा सहारा देगा। तेरे राज्य का आरम्भ सिय्योन पर होगा,
3 तेरे पराक्रम के दिन तेरी प्रजा के लोग स्वेच्छा वलि बनेंगे।
4 यहोवा ने एक वचन दिया, और यहोवा अपना मन नहीं बदलेगा: “तू नित्य याजक है।
5 मेरे स्वामी, तूने उस दिन अपना क्रोध प्रकट किया था।
6 परमेश्वर राष्ट्रों का न्याय करेगा।
7 राह के झरने से जल पी के ही राजा अपना सिर उठायेगा