1 हे परमेश्वर, मेरी विनती की ओर से
2 दुष्ट जन मेरे विषय में झूठी बातें कर रहे हैं।
3 लोग मेरे विषय में घिनौनी बातें कह रहे हैं।
4 मैंने उन्हें प्रेम किया, वे मुझसे बैर करते हैं।
5 मैंने उन व्यक्तियों के साथ भला किया था।
6 मेरे उस शत्रु ने जो बुरे काम किये हैं उसको दण्ड दे।
7 न्यायाधीश न्याय करे कि शत्रु ने मेरा बुरा किया है, और मेरे शत्रु जो भी कहे वह अपराधी है
8 मेरे शत्रु को शीघ्र मर जाने दे।
9 मेरे शत्रु की सन्तानों को अनाथ कर दे और उसकी पत्नी को तू विधवा कर दे।
10 उनका घर उनसे छूट जायें
11 कुछ मेरे शत्रु का हो उसका लेनदार छीन कर ले जायें।
12 मेरी यही कामना है, मेरे शत्रु पर कोई दया न दिखाये,
13 पूरी तरह नष्ट कर दे मेरे शत्रु को।
14 मेरी कामना यह है कि मेरे शत्रु के पिता
15 यहोवा सदा ही उन पापों को याद रखे
16 क्यों क्योंकि उस दुष्ट ने कोई भी अच्छा कर्म कभी भी नहीं किया।
17 उस दुष्ट लोगों को शाप देना भाता था।
18 वह शाप को वस्त्रों सा ओढ़ लें।
19 शाप ही उस दुष्ट जन का वस्त्र बने जिनको वह लपेटे,
20 मुझको यह आशा है कि यहोवा मेरे शत्रु के साथ इन सभी बातों को करेगा।
21 यहोवा तू मेरा स्वामी है। सो मेरे संग वैसा बर्ताव कर जिससे तेरे नाम का यश बढ़े।
22 मैं बस एक दीन, असहाय जन हूँ।
23 मुझे ऐसा लग रहा जैसे मेरा जीवन साँझ के समय की लम्बी छाया की भाँति बीत चुका है।
24 क्योंकि मैं भूखा हूँ इसलिए मेरे घुटने दुर्बल हो गये हैं।
25 बुरे लोग मुझको अपमानित करते।
26 यहोवा मेरा परमेश्वर, मुझको सहारा दे!
27 फिर वे लोग जान जायेंगे कि तूने ही मुझे बचाया है।
28 वे लोग मुझे शाप देते रहे। किन्तु यहोवा मुझको आशीर्वाद दे सकता है।
29 मेरे शत्रुओं को अपमानित कर!
30 मैं यहोवा का धन्यवाद करता हूँ।
31 क्यों? क्योंकि यहोवा असहाय लोगों का साथ देता है।