1 मैं यहोवा पर भरोसा करता हूँ।
2 दुष्ट जन शिकारी के समान हैं। वे अन्धकार में छिपते हैं।
3 क्या होगा यदि वे समाज की नींव को उखाड़ फेंके?
4 यहोवा अपने विशाल पवित्र मन्दिर में विराजा है।
5 यहोवा भले व बुरे लोगों को परखता है,
6 वह गर्म कोयले और जलती हुई गन्धक को वर्षा की भाँति उन बुरे लोगों पर गिरायेगा।
7 किन्तु यहोवा, तू उत्तम है। तुझे उत्तम जन भाते हैं।