1 मैं व्याकुल हूँ, क्यों क्योंकि मैं गर्मी के उस फल सा हूँ जिसे अब तक बीन लिया गया है।
2 इसका अर्थ यह है कि सभी सच्चे लोग जाते रहे हैं।
3 लोग दोनों हाथों से बुरा करने में पारंगत हैं।
4 यहाँ तक कि उनका सर्वोच्च काँटों की झाड़ी सा होता है।
5 तुम अपने पड़ोसी का भरोसा मत करो!
6 व्यक्ति के अपने ही घर के लोग उसके शत्रु हो जायेंगे।
7 मैं सहायता के लिये यहोवा को निहारूँगा!
8 मेरा पतन हुआ है।
9 यहोवा के विरूद्ध मैंने पाप किया था।
10 फिर मेरी बैरिन यह देखेगी
11 वह समय आयेगा, जब तेरे परकोटे का फिर निर्माण होगा,
12 तेरे लोग तेरी धरती पर लौट आयेंगे।
13 धरती उन लोगों के कारण जो इसके निवासी थे
14 सो अपने राजदण्ड से तू उन लोगों का शासन कर।
15 जब मैं तुमको मिस्र से निकाल कर लाया था, तो मैंने बहुत से चमत्कार किये थे।
16 वे चमत्कार जातियाँ देखेंगी
17 वे सांप से धूल चाटते हुये धरती पर लोटेंगे,
18 तेरे समान कोई परमेश्वर नहीं है।
19 हे यहोवा, हमारे पापों को दूर करके फिर हमको सुख चैन देगा,
20 याकूब के हेतु तू सच्चा होगा।