1 जो यहोवा कहता है, उस पर तुम कान दो।
2 यहोवा को अपने लोगों से एक शिकायत है।
3 यहोवा कहता है: “हे मेरे लोगों, क्या मैंने कभी तुम्हारा कोई बुरा किया है?
4 मैं तुमको बताता हूँ जो मैंने तुम्हारे साथ किया है,
5 हे मेरे लोगों, मोआब के राजा बालाक के कुचक्र याद करो।
6 जब मैं यहोवा के सामने जाऊँ और प्रणाम करूँ,
7 क्या यहोवा एक हजार मेढ़ों से
8 हे मनुष्य, यहोवा ने तुझे वह बातें बतायीं हैं जो उत्तम हैं।
9 यहोवा की वाणी यरूशलेम नगर को पुकार रही है।
10 क्या अब भी दुष्ट अपने चुराये खजाने को
11 क्या मैं उन ऐसे बुरे लोगों को नजर अंदाज कर दूँ जो अब भी खोटे बाँट और खोटी तराजू लोगों को ठगने के काम में लाते हैं?
12 उस नगर के धनी पुरूष अभी भी क्रूर कर्म करते हैं!
13 सो मैंने तुम्हें दण्ड देना शुरू कर दिया है।
14 तुम खाना खाओगे किन्तु तुम्हारा पेट नहीं भरेगा।
15 तुम अपने बीज बोओगे
16 ऐसा क्यों होगा? क्योंकि तुम ओम्री के नियमों पर चलते हो।