1 हे यहोवा, हमारे साथ जो घटा हैं, याद रख।
2 हमारी धरती परायों के हाथों में दे दी गयी।
3 हम अनाथ हो गये।
4 पानी पीने तक हमको मोल देना पड़ता है, इंधन की लकड़ी तक खरीदनी पड़ती हैं।
5 अपने कन्धों पर हमें जुए का बोझ उठाना पड़ता है।
6 हमने मिस्र के साथ एक वाचा किया;
7 हमारे पूर्वजों ने तेरे विरोध में पाप किये थे।
8 हमारे दास ही स्वामी बने हैं।
9 बस भोजन पाने को हमें अपना जीवन दांव पर लगाना पड़ता है।
10 हमारी खाल तन्दूर सी तप रही है,
11 सिय्योन की स्त्रियों के साथ कुकर्म किये गये हैं।
12 हमारे राजकुमार फाँसी पर चढ़ाये गये;
13 हमारे वे शत्रुओं ने हमारे युवा पुरुषों से चक्की में आटा पिसवाया।
14 हमारे बुजुर्ग अब नगर के द्वारों पर बैठा नहीं करते।
15 हमारे मन में अब कोई खुशी नहीं है।
16 हमारा मुकुट हमारे सिर से गिर गया है।
17 इसलिये हमारे मन रोगी हुए है; इन ही बातों से हमारी आँखें मद्धिम हुई है।
18 सिय्योन का पर्वत विरान हो गया है।
19 किन्तु हे यहोवा, तेरा राज्य तो अमर हैं।
20 हे यहोवा, ऐसा लगता है जैसे तू हमको सदा के लिये भूल गया है।
21 हे यहोवा, हमको तू अपनी ओर मोड़ ले।
22 क्या तूने हमें पूरी तरह बिसरा दिया