Jeremias 5

HIN2010

1 यहोवा कहता है, “यरूशलेम की सड़कों पर ऊपर नीचे जाओ। चारों ओर देखो और इन चीजों के बारे में सोचो। नगर के सार्वजनिक चौराहो को खोजो, पता करो कि क्या तुम किसी एक अच्छे व्यक्ति को पा सकते हो, ऐसे व्यक्ति को जो ईमानदारी से काम करता हो, ऐसा जो सत्य की खोज करता हो। यदि तुम एक अच्छे व्यक्ति को ढूँढ निकालोगे तो मैं यरूशलेम को क्षमा कर दूँगा!

2 लोग प्रतिज्ञा करते हैं और कहते हैं, ‘जैसा कि यहोवा शाश्वत है।’ किन्तु वे सच्चाई से यही तात्पर्य नहीं रखते।”

3 हे यहोवा, मैं जानता हूँ कि तू लोगों में सच्चाई देखना चाहता है।

4 किन्तु मैं (यिर्मयाह) ने अपने से कहा,

5 इसलिये मैं यहूदा के लोगों के प्रमुखों के पास जाऊँगा।

6 वे परमेश्वर के विरुद्ध हुए, अत: जंगल का एक सिंह उन पर आक्रमण करेगा।

7 परमेश्वर ने कहा, “यहूदा, मुझे कारण बताओ कि मुझे तुमको क्षमा क्यों कर देना चाहिये तुम्हारी सन्तानों ने मुछे त्याग दिया है।

8 वे उन घोड़ों जैसे रहे जिन्हें बहुत खाने को है, और जो जोड़ा बनाने को हो।

9 क्या मुझे यहूदा के लोगों को ये काम करने के कारण, दण्ड देना चाहिए यह सन्देश यहोवा का है।

10 यहूदा की अंगूर की बेलों की कतारों के सहारे से निकलो।

11 इस्राएल और यहूदा के परिवार हर प्रकार से मेरे विश्वासघाती रहे हैं।”

12 “उन लोगों ने यहोवा के बारे में झूठ कहा है।

13 झूठे नबी मरे प्राण हैं।

14 सर्वशक्तिमान परमेश्वर यहोवा ने यह सब कहा, “उन लोगों ने कहा कि मैं उन्हें दण्ड नहीं दूँगा।

15 इस्राएल के परिवार, यह सन्देश यहोवा का है, “तुम पर आक्रमण के लिये मैं एक राष्ट्र को बहुत दूर से जल्दी ही लाऊँगा।

16 उनके तरकश खुली कब्र हैं, उनके सभी लोग वीर सैनिक हैं।

17 वे सैनिक तुम्हारी घर लाई फसल को खा जाएंगे।

18 यह सन्देश यहोवा का है:

19 यहूदा के लोग तुमसे पूछेंगे,

20 यहोवा ने कहा, “याकूब के परिवार में, इस सन्देश की घोषणा करो।

21 इस सन्देश को सुनो,

22 निश्चय ही तुम मुझसे भयभीत हो।”

23 किन्तु यहूदा के लोग हठी हैं।

24 यहूदा के लोग कभी अपने से नहीं कहते, “हमें अपने परमेश्वर यहोवा से डरना

25 यहूदा के लोगों, तुमने अपराध किया है। अत: वर्षा और पकी फसल नहीं आई।

26 मेरे लोगों के बीच पापी लोग हैं।

27 इन व्यक्तियों के घर झूठ से वैसे भरे होते हैं, जैसे चिड़ियों से भरे पिंजरे हों।

28 जिन पापों को उन्होंने किया है उन्ही से वे बड़े और मोटे हुए हैं।

29 क्या मुझे इन कामों के करने के कारण यहूदा को दण्ड देना चाहिये?”

30 यहोवा कहता है, “यहूदा देश में एक भयानक और दिल दहलाने वाली घटना घट रही है।

31 नबी झूठ बोलते हैं,

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