1 यह सन्देश यहोवा का है।
2 यदि तुम वे काम करोगे तो प्रतिज्ञा करने के लिये मेरे नाम का उपयोग करने योग्य बनोगे, तुम यह कहने योग्य होगे,
3 यहूदा राष्ट्र के मनुष्यों और यरूशलेम नगर से, यहोवा जो कहता है, वह यह है:
4 यहोवा के लोग बनो, अपने हृदय को बदलो।
5 यहूदा के लोगों में इस सन्देश की घोषणा करो:
6 सिय्योन की ओर सूचक ध्वज उठाओ, अपने जीवन के लिये भागो, प्रतीक्षा न करो।
7 एक सिंह अपनी गुफा से निकला है, राष्ट्रों का विध्वंसक तेज कदम बढ़ाना आरम्भ कर चुका है।
8 अत: टाट के कपड़े पहनो, रोओ,
9 यह सन्देश यहोवा का है, “ऐसे समय यह होता है।
10 तब मैंने अर्थात् यिर्मयाह ने कहा, “मेरे स्वामी यहोवा, तूने सचमुच यहूदा और यरूशलेम के लोगों को धोखे में रखा है। तूने उनसे कहा, ‘तुम शान्तिपूर्वक रहोगे।’ किन्तु अब उनके गले तर तलवार खिंची हुई है।”
11 उस समय एक सन्देश यहूदा और यरूशलेम के लोगों को दिया जाएगा:
12 यह उससे अधिक तेज हवा है और मुझसे आ रही है।
13 देखो! शत्रु मेघ की तरह उठ रहा है, उसके रथ चक्रवात के समान है।
14 यरूशलेम के लोगों, अपने हृदय से बुराइयों को धो डालो।
15 दान देश के दूत की वाणी, जो वह बोलता है, ध्यान से सुनो।
16 “इस राष्ट्र को इसका विवरण दो।
17 शत्रुओं ने यरूशलेम को ऐसे घेरा है जैसे खेत की रक्षा करने वाले लोग हो।
18 “जिस प्रकार तुम रहे और तुमने पाप किया उसी से तुम पर यह विपत्ति आई।
19 आह, मेरा दुःख और मेरी परेशानी मेरे पेट में दर्द कर रही हैं।
20 ध्वंस के पीछे विध्वंस आता है। पूरा देश नष्ट हो गया है।
21 हे यहोवा, मैं कब तक युद्ध पताकायें देखुँगा युद्ध की तुरही को कितने समय सुनूँगा
22 परमेश्वर ने कहा, “मेरे लोग मूर्ख हैं। वे मुझे नहीं जानते।
23 मैंने धरती को देखा।
24 मैंने पर्वतों पर नजर डाली और वे काँप रहे थे। सभी पहाड़ियाँ लड़खड़ा रही थीं।
25 मैंने ध्यान से देखा, किन्तु कोई मनुष्य नहीं था, आकाश के सभी पक्षी उड़ गए थे।
26 मैंने देखा कि सुहावना प्रदेश मरुभूमि बन गया था।
27 यहोवा ये बातें कहता है: “पूरा देश बरबाद हो जाएगा।
28 अत: इस देश के लोग मेरे लोगों के लिये रोयेंगे।
29 यहूदा के लोग घुड़सवारों और धनुर्धारियों का उद्घोष सुनेंगे, और लोग भाग जायेंगे।
30 हे यहूदा, तुम नष्ट कर दिये गये हो, तुम क्या कर रहे हो तुम अपने सुन्दरतम लाल वस्त्र क्यों पहनते हो
31 मैं एक चीख सुनता हूँ जो उस स्त्री की चीख की तरह है जो बच्चा जन्म रही हो।