Jó 7

HIN2010

1 अय्यूब ने कहा,

2 मनुष्य उस भाड़े के श्रमिक जैसा है जो तपते हुए दिन में मेहनत करने के बाद शीतल छाया चाहता है

3 महीने दर महीने बेचैनी के गुजर गये हैं

4 जब मैं लेटता हूँ, मैं सोचा करता हूँ कि

5 मेरा शरीर कीड़ों और धूल से ढका हुआ है।

6 “मेरे दिन जुलाहे की फिरकी से भी अधिक तीव्र गति से बीत रहें हैं।

7 हे परमेश्वर, याद रख, मेरा जीवन एक फूँक मात्र है।

8 अभी तू मुझको देख रहा है किन्तु फिर तू मुझको नहीं देख पायेगा।

9 एक बादल छुप जाता है और लुप्त हो जाता है।

10 वह अपने पुराने घर को वापस कभी भी नहीं लौटेगा।

11 “अत: मैं चुप नहीं रहूँगा। मैं सब कह डालूँगा।

12 हे परमेश्वर, तू मेरी रखवाली क्यों करता है

13 जब मुझ को लगता है कि मेरी खाट मुझे शान्ति देगी

14 हे परमेश्वर, तभी तू मुझे स्वप्न में डराता है,

15 इसलिए जीवित रहने से अच्छा

16 मैं अपने जीवन से घृणा करता हूँ।

17 हे परमेश्वर, मनुष्य तेरे लिये क्यों इतना महत्वपूर्ण है

18 हर प्रात: क्यों तू मनुष्य के पास आता है

19 हे परमेश्वर, तू मुझसे कभी भी दृष्टि नहीं फेरता है

20 हे परमेश्वर, तू लोगों पर दृष्टि रखता है।

21 क्यों तू मेरी गलतियों को क्षमा नहीं करता और मेरे पापों को

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