Jó 37

HIN2010

1 “हे अय्यूब, जब इन बातों के विषय में मैं सोचता हूँ,

2 हर कोई सुनों, परमेश्वर की वाणी बादल की गर्जन जैसी सुनाई देती है।

3 परमेश्वर अपनी बिजली को सारे आकाश से होकर चमकने को भेजता है।

4 बिजली के कौंधने के बाद परमेश्वर की गर्जन भरी वाणी सुनी जा सकती है।

5 परमेश्वर की गरजती हुई वाणी अद्भुत है।

6 परमेश्वर हिम से कहता है,

7 परमेश्वर ऐसा इसलिये करता है कि सभी व्यक्ति जिनको उसने बनाया है

8 पशु अपने खोहों में भाग जाते हैं, और वहाँ ठहरे रहते हैं।

9 दक्षिण से तूफान आते हैं,

10 परमेश्वर का श्वास बर्फ को रचता है,

11 परमेश्वर बादलों को जल से भरा करता है,

12 परमेश्वर बादलों को आने देता है कि वह उड़ कर सब कहीं धरती के ऊपर छा जाये और फिर बादल वहीं करते हैं जिसे करने का आदेश परमेश्वर ने उन्हें दिया है।

13 परमेश्वर बाढ़ लाकर लोगों को दण्ड देने अथवा धरती को जल देकर अपना प्रेम दर्शाने के लिये बादलों को भेजता है।

14 “अय्यूब, तू क्षण भर के लिये रुक और सुन।

15 अय्यूब, क्या तू जानता है कि परमेश्वर बादलों पर कैसे काबू रखता है क्या तू जानता है कि परमेश्वर अपनी बिजली को क्यों चमकाता है

16 क्या तू यह जानता है कि आकाश में बादल कैसे लटके रहते हैं।

17 किन्तु अय्यूब, तुम ये बातें नहीं जानते।

18 अय्यूब, क्या तू परमेश्वर की मदद आकाश को फैलाने में और उसे झलकाये गये दर्पण की तरह चमकाने में कर सकता है

19 “अय्यूब, हमें बता कि हम परमेश्वर से क्या कहें।

20 क्या परमेश्वर से यह कह दिया जाये कि मैं उस के विरोध में बोलना चाहता हूँ।

21 देख, कोई भी व्यक्ति चमकते हुए सूर्य को नहीं देख सकता।

22 और परमेश्वर भी उसके समान है।

23 सर्वशक्तिमान परमेश्वर सचमुच महान है,

24 इसलिए लोग परमेश्वर का आदर करते हैं,

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