Jó 36

HIN2010

1 एलीहू ने बात जारी रखते हुए कहा:

2 “अय्यूब, मेरे साथ थोड़ी देर और धीरज रख।

3 मैं अपने ज्ञान को सबसे बाटूँगा।

4 अय्यूब, तू यह निश्चय जान कि जो कुछ मैं कहता हूँ, वह सब सत्य है।

5 “परमेश्वर शक्तिशाली है

6 परमेश्वर दुष्ट लोगों को जीने नहीं देगा

7 वे लोग जो उचित व्यवहार करते हैं, परमेश्वर उनका ध्यान रखता है।

8 किन्तु यदि लोग दण्ड पाते हों और बेड़ियों में जकड़े हों।

9 तो परमेश्वर उनको बतायेगा कि उन्होंने कौन सा बुरा काम किया है।

10 परमेश्वर उनको उसकी चेतावनी सुनने को विवश करेगा।

11 यदि वे लोग परमेश्वर की सुनेंगे

12 किन्तु यदि वे लोग परमेश्वर की आज्ञा नकारेंगे तो वे मृत्यु के जगत में चले जायेंगे,

13 “ऐसे लोग जिनको परवाह परमेश्वर की वे सदा कड़वाहट से भरे रहे है।

14 ऐसे लोग जब जवान होंगे तभी मर जायेंगे।

15 किन्तु परमेश्वर दु:ख पाते लोगों को विपत्तियों से बचायेगा।

16 “अय्यूब, परमेश्वर तुझको तेरी विपत्तियों से दूर करके तुझे सहारा देना चाहता है।

17 किन्तु अब अय्यूब, तुझे वैसा ही दण्ड मिल रहा है, जैसा दण्ड मिला करता है दुष्टों को, तुझको परमेश्वर का निर्णय और खरा न्याय जकड़े हुए है।

18 अय्यूब, तू अपनी नकेल धन दौलत के हाथ में न दे कि वह तुझसे बुरा काम करवाये।

19 तू ये जान ले कि अब न तो तेरा समूचा धन तेरी सहायता कर सकता है और न ही शक्तिशाली व्यक्ति तेरी सहायता कर सकते हैं।

20 तू रात के आने की इच्छा मत कर जब लोग रात में छिप जाने का प्रयास करते हैं।

21 अय्यूब, बुरा काम करने से तू सावधान रह।

22 “देख, परमेश्वर की शक्ति उसे महान बनाती है।

23 परमेश्वर को क्या करना है, कोई भी व्यक्ति सको बता नहीं सकता।

24 परमेश्वर के कर्मो की प्रशंसा करना तू मत भूल।

25 परमेश्वर के कर्म को हर कोई व्यक्ति देख सकता है।

26 यह सच है कि परमेश्वर महान है। उसकी महिमा को हम नहीं समझ सकते हैं।

27 “परमेश्वर जल को धरती से उपर उठाता है,

28 परमेश्वर बादलों से जल बरसाता है,

29 कोई भी व्यक्ति नहीं समझ सकता कि परमेश्वर कैसे बादलों को बिखराता है,

30 देख, परमेश्वर कैसे अपनी बिजली को आकाश में चारों ओर बिखेरता है

31 परमेश्वर राष्ट्रों को नियंत्रण में रखने

32 परमेश्वर अपने हाथों से बिजली को पकड़ लेता है और जहाँ वह चाहता हैं,

33 गर्जन, तूफान के आने की चेतावनी देता है।

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