1 “सर्वशक्तिमान परमेश्वर क्यों नहीं न्याय करने के लिये समय नियुक्त करता है?
2 “लोग अपनी सम्पत्ति के चिन्हों को, जो उसकी सीमा बताते है, सरकाते रहते हैं ताकि अपने पड़ोसी की थोड़ी और धरती हड़प लें!
3 अनाथ बच्चों के गधे को वे चुरा ले जाते हैं।
4 वे दीन जन को मजबूर करते है कि वह छोड़ कर दूर हट जाने को विवश हो जाता है,
5 “वे दीन जन उन जंगली गदहों जैसे हैं जो मरुभूमि में अपना चारा खोजा करते हैं।
6 गरीब लोग भूसा और चारा साथ साथ ऐसे उन खेतों से पाते हैं जिनके वे अब स्वामी नहीं रहे।
7 दीन जन को बिना कपड़ों के रातें बितानी होंगी,
8 वे वर्षा से पहाड़ों में भीगें हैं, उन्हें बड़ी चट्टानों से सटे हुये रहना होगा,
9 बुरे लोग माता से वह बच्चा जिसका पिता नहीं है छीन लेते हैं।
10 गरीब लोगों के पास वस्त्र नहीं होते हैं, सो वे काम करते हुये नंगे रहा करते हैं।
11 गरीब लोग जैतून का तेल पेर कर निकालते हैं।
12 मरते हुये लोग जो आहें भरते हैं। वे नगर में सुनाई देती हैं।
13 “कुछ ऐसे लोग हैं जो प्रकाश के विरुद्ध होते हैं।
14 हत्यारा तड़के जाग जाया करता है गरीबों और जरुरत मंद लोगों की हत्या करता है,
15 वह व्यक्ति जो व्यभिचार करता है, रात आने की बाट जोहा करता है,
16 दुष्ट जन जब रात में अंधेरा होता है, तो सेंध लगा कर घर में घुसते हैं।
17 उन दुष्ट लोगों का अंधकार सुबह सा होता है,
18 “दुष्ट जन ऐसे वहा दिये जाते हैं, जैसे झाग बाढ़ के पानी पर।
19 जैसे गर्म व सूखा मौसम पिघलती बर्फ के जल को सोख लेता है,
20 दुष्ट मरने के बाद उसकी माँ तक उसे भूल जायेगी, दुष्ट की देह को कीड़े खा जायेंगे।
21 ऐसी स्त्री को जिसके बच्चे नहीं हो सकते, दुष्ट जन उन्हें सताया करते हैं,
22 बुरे लोग अपनी शक्ति का उपयोग बलशाली को नष्ट करने के लिये करते है।
23 सम्भव है थोड़े समय के लिये परमेश्वर शक्तिशाली को सुरक्षित रहने दे,
24 दुष्ट जन थोड़े से समय के लिये सफलता पा जाते हैं किन्तु फिर वे नष्ट हो जाते हैं।
25 “यदि ये बातें सत्य नहीं हैं तो