Jó 22

HIN2010

1 फिर तेमान नगर के एलीपज ने उत्तर देते हुए कहा:

2 “परमेश्वर को कोई भी व्यक्ति सहारा नहीं दे सकता,

3 यदि तूने वही किया जो उचित था तो इससे सर्वशक्तिमान परमेश्वर को आनन्द नहीं मिलेगा,

4 अय्यूब, तुझको परमेश्वर क्यों दण्ड देता है और क्यों तुझ पर दोष लगाता है

5 नहीं, ये इसलिए की तूने बहुत से पाप किये हैं,

6 अय्यूब, सम्भव है कि तूने अपने किसी भाई को कुछ धन दिया हो,

7 तूने थके—मांदे को जल नहीं दिया,

8 अय्यूब, यद्यपि तू शक्तिशाली और धनी था,

9 किन्तु तूने विधवाओं को बिना कुछ दिये लौटा दिया।

10 इसलिए तेरे चारों तरफ जाल बिछे हुए हैं

11 इसलिए इतना अंधकार है कि तुझे सूझ पड़ता है

12 “परमेश्वर आकाश के उच्चतम भाग में रहता है, वह सर्वोच्च तारों के नीचे देखता है,

13 किन्तु अय्यूब, तू तो कहा करता है कि परमेश्वर कुछ नहीं जानता,

14 घने बादल उसे छुपा लेते हैं, इसलिये जब वह आकाश के उच्चतम भाग में विचरता है

15 “अय्यूब, तू उस ही पुरानी राह पर

16 अपनी मृत्यु के समय से पहले ही दुष्ट लोग उठा लिये गये,

17 ये वही लोग है जो परमेश्वर से कहते हैं कि हमें अकेला छोड़ दो,

18 किन्तु परमेश्वर ने उन लोगों को सफल बनाया है और उन्हें धनवान बना दिया।

19 सज्जन जब बुरे लोगों का नाश देखते हैं, तो वे प्रसन्न होते है।

20 ‘हमारे शत्रु सचमुच नष्ट हो गये!

21 “अय्यूब, अब स्वयं को तू परमेश्वर को अर्पित कर दे, तब तू शांति पायेगा।

22 उसकी सीख अपना ले,

23 अय्यूब, यदि तू फिर सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास आये तो फिर से पहले जैसा हो जायेगा।

24 तुझको चाहिये कि तू निज सोना धूल में

25 तब सर्वशक्तिमान परमेश्वर तेरे लिये

26 तब तू अति प्रसन्न होगा और तुझे सुख मिलेगा।

27 जब तू उसकी विनती करेगा तो वह तेरी सुना करेगा,

28 जो कुछ तू करेगा उसमें तुझे सफलता मिलेगी,

29 परमेश्वर अहंकारी जन को लज्जित करेगा,

30 परमेश्वर जो मनुष्य भोला नहीं है उसकी भी रक्षा करेगा,

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