1 अय्यूब ने कहा:
2 मैं भी उतना ही जानता हूँ जितना तू जानता है,
3 किन्तु मुझे इच्छा नहीं है कि मैं तुझ से तर्क करूँ,
4 किन्तु तुम तीनो लोग अपने अज्ञान को मिथ्या विचारों से ढकना चाहते हो।
5 मेरी यह कामना है कि तुम पूरी तरह चुप हो जाओ,
6 “अब, मेरी युक्ति सुनो!
7 क्या तुम परमेश्वर के हेतु झूठ बोलोगे
8 क्या तुम मेरे विरुद्ध परमेश्वर का पक्ष लोगे
9 यदि परमेश्वर ने तुमको अति निकटता से जाँच लिया तो
10 यदि तुम न्यायालय में छिपे छिपे किसी का पक्ष लोगे
11 भव्य तेज तुमको डरायेगा
12 तुम सोचते हो कि तुम चतुराई भरी और बुद्धिमत्तापूर्ण बातें करते हो, किन्तु तुम्हारे कथन राख जैसे व्यर्थ हैं।
13 “चुप रहो और मुझको कह लेने दो।
14 मैं स्वयं को संकट में डाल रहा हूँ
15 चाहे परमेश्वर मुझे मार दे।
16 किन्तु सम्भव है कि परमेश्वर मुझे बचा ले, क्योंकि मैं उसके सामने निडर हूँ।
17 उसे ध्यान से सुन जिसे मैं कहता हूँ,
18 अब मैं अपना बचाव करने को तैयार हूँ।
19 कोई भी व्यक्ति यह प्रमाणित नहीं कर सकता कि मैं गलत हूँ।
20 “हे परमेश्वर, तू मुझे दो बाते दे दे,
21 मुझे दण्ड देना और डराना छोड़ दे,
22 फिर तू मुझे पुकार और मैं तुझे उत्तर दूँगा,
23 कितने पाप मैंने किये हैं
24 हे परमेश्वर, तू मुझसे क्यों बचता है
25 क्या तू मुझको डरायेगा
26 हे परमेश्वर, तू मेरे विरोध में कड़वी बात बोलता है।
27 मेरे पैरों में तूने काठ डाल दिया है, तू मेरे हर कदम पर आँख गड़ाये रखता है।
28 मैं सड़ी वस्तु सा क्षीण होता जाता हूँ