1 पतूएल के पुत्र योएल ने यहोवा से इस संदेश को प्राप्त किया:
2 मुखियों, इस संदेश को सुनो!
3 इन बातों के बारे में तुम अपने बच्चों को बताया करोगे
4 कुतरती हुई टिड्डियों से जो कुछ भी बचा,
5 ओ मतवालों, जागो, उठो और रोओ!
6 देखो, विशाल शक्तिशाली लोग मेरे देश पर आक्रमण करने को आ रहे हैं।
7 वे “टिड्डे” मेरे बागों के अंगूर चट कर जायेंगे!
8 उस युवती सा रोओ, जिसका विवाह होने को है
9 हे याजकों! हे यहोवा के सेवकों, विलाप करो!
10 खेत उजड़ गये हैं।
11 हे किसानो, तुम दु:खी होवो!
12 अंगूर की बेलें सूख गयी हैं
13 हे याजकों, शोक वस्त्र धारण करो, जोर से विलाप करो।
14 लोगों को बता दो कि एक ऐसा समय आयेगा जब भोजन नहीं किया जायेगा। एक विशेष सभा के लिए लोगों को बुला लो। सभा में मुखियाओं और उस धरती पर रहने वाले सभी लोगों को इकट्ठा करो। उन्हें अपने यहोवा परमेश्वर के मन्दिर में ले आओ और यहोवा से विनती करो।
15 दु:खी रहो क्योंकि यहोवा का वह विशेष दिन आने को है। उस समय दण्ड इस प्रकार आयेगा जैसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर का कोई आक्रमण हो।
16 हमारा भोजन हमारे देखते—देखते चट हो गया है। हमारे परमेश्वर के मन्दिर से आनन्द और प्रसन्नता जाती रही है।
17 हमने बीज तो बोये थे, किन्तु वे धरती में पड़े—पड़े सूख कर मर गये हैं। हमारे पौधे सूख कर मर गये हैं। हमारे खेत्ते खाली पड़े हैं और ढह रहे हैं।
18 हमारे पशु भूख से कराह रहे हैं। हमारे मवेशी खोये—खोये से इधर—उधर घूमते हैं। उनके पास खाने को घास नहीं हैं। भेड़ें मर रही हैं।
19 हे यहोवा, मैं तेरी दुहाई दे रहा हूँ। क्योंकि हमारी चरागाहों को आग ने रेगिस्तान बना दिया है। बगीचों के सभी पेड़ लपटों से झुलस गये हैं।
20 जंगली पशु भी तेरी सहायता चाहते हैं। नदियाँ सूख गयी हैं। कहीं पानी का नाम नहीं! आग ने हमारी हरी—भरी चरागाहों को मरूभूमि में बदल दिया है।