1 यदि तू आकाश चीर कर धरती पर नीचे उतर आये
2 पहाड़ों में लपेट उठेंगी।
3 किन्तु हम सचमुच नहीं चाहते हैं
4 सचमुच तेरे ही लोगों ने तेरी कभी नहीं सुनी।
5 जिनको अच्छे काम करने में रस आता है, तू उन लोगों के साथ है।
6 हम सभी पाप से मैले हैं।
7 हम तेरी उपासना नहीं करते हैं। हम को तेरे नाम में विश्वास नहीं है।
8 किन्तु यहोवा, तू हमारा पिता है।
9 हे यहोवा, तू हमसे कुपित मत बना रह!
10 तेरी पवित्र नगरियाँ उजड़ी हुई हैं।
11 हमारा पवित्र मन्दिर आग से भस्म हुआ है।
12 क्या ये वस्तुएँ सदैव तुझे अपना प्रेम हम पर प्रकट करने से दूर रखेंगी