1 “हे प्यासे लोगों, जल के पास आओ।
2 व्यर्थ ही अपना धन ऐसी किसीवस्तु पर क्यों बर्बाद करते हो जो सच्चा भोजन नहीं है
3 जो कुछ मैं कहता हूँ, ध्यान से सुनो।
4 मैंने अपनी उस शक्ति का दाऊद को साक्षी बनाया था जो सभी राष्ट्रों के लिये थी।
5 अनेक अज्ञात देशों में अनेक अनजानी जातियाँ हैं।
6 सो तुम यहोवा को खोजो।
7 हे पापियों! अपने पापपूर्ण जीवन को त्यागो।
8 यहोवा कहता है, “तुम्हारे विचार वैसे नहीं, जैसे मेरे हैं।
9 जैसे धरती से ऊँचे स्वर्ग हैं वैसे ही तुम्हारी राहों से मेरी राहें ऊँची हैं
10 “आकाश से वर्षा और हिम गिरा करते हैं
11 ऐसे ही मेरे मुख में से मेरे शब्द निकलते हैं
12 “जब तुम्हें आनन्द से भरकर शांति और एकता के साथ में उस धरती से छुड़ाकर ले जाया जा रहा होगा जिसमें तुम बन्दी थे, तो तुम्हारे सामने खुशी में पहाड़ फट पड़ेंगे और थिरकने लगेंगे।
13 जहाँ कंटीली झाड़ियाँ उगा करती हैं वहाँ देवदार के विशाल वृक्ष उगेंगे।