Isaías 54

HIN2010

1 “हे स्त्री, तू प्रसन्न से हो जा!

2 “अपने तम्बू विस्तृत कर,

3 क्यों क्योंकि तू अपनी वंश—बेल दायें और बायें फैलायेगी।

4 तू भयभीत मत हो, तू लज्जित नहीं होगी।

5 क्यों क्योंकि तेरा पति वही था जिसने तुझको रचा था।

6 “तू एक ऐसी स्त्री के जैसी थी जिसको उसके ही पति ने त्याग दिया था।

7 तेरा परमेश्वर कहता है, “मैंने तुझे थोड़े समय के लिये त्यागा था।

8 मैं बहुत कुपित हुआ

9 परमेश्वर कहता है, “यह ठीक वैसा ही है जैसे नूह के काल में मैंने बाढ़ के द्वारा दुनियाँ को दण्ड दिया था।

10 यहोवा कहता है, “चाहे पर्वत लुप्त हो जाये

11 “हे नगरी, हे दुखियारी!

12 मैं तेरी दीवारें चुनने में माणिक को लगाऊँगा।

13 तेरी सन्तानें यहोवा द्वारा शिक्षित होंगी।

14 मैं तेरा निर्माण खरेपन से करूँगा ताकि तू दमन और अन्याय से दूर रहे।

15 मेरी कोई भी सेना तुझसे कभी युद्ध नहीं करेगी

16 “देखो, मैंने लुहार को बनाया है। वह लोहे को तपाने के लिए धौंकनी धौंकता है। फिर वह तपे लोहे से जैसे चाहता है, वैसे औजार बना लेता है। उसी प्रकार मैंने ‘विनाशकर्त्ता’ को बनाया है जो वस्तुओं को नष्ट करता है।

17 “तुझे हराने के लिए लोग हथियार बनायेंगे किन्तु वे हथियार तुझे कभी हरा नहीं पायेंगे। कुछ लोग तेरे विरोध में बोलेंगे। किन्तु हर ऐसे व्यक्ति को बुरा प्रमाणित किया जायेगा जो तेरे विरोध में बोलेगा।”

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