1 हे दूर देशों के लोगों,
2 यहोवा अपने बोलने के लिये मेरा उपयोग करता है।
3 यहोवा ने मुझे बताया है, “इस्राएल, तू मेरा सेवक है।
4 मैंने कहा, “मैं तो बस व्यर्थ ही कड़ी मेहनत करता रहा।
5 यहोवा ने मुझे मेरी माता के गर्भ में रचा था।
6 “तू मेरे लिये मेरा अति महत्त्वपूर्ण दास है।
7 इस्राएल का पवित्र यहोवा, इस्राएल की रक्षा करता है और यहोवा कहता है, “मेरा दास विनम्र है।
8 यहोवा कहता है,
9 तुम बन्दियों से कहोगे, ‘तुम अपने कारागार से बाहर निकल आओ!’
10 लोग भूखे नहीं रहेंगे, लोग प्यासे नहीं रहेंगे।
11 मैं अपने लोगों के लिये एक राह बनाऊँगा।
12 देखो, दूर दूर देशों से लोग यहाँ आ रहे हैं।
13 हे आकाशों, हे धरती, तुम प्रसन्न हो जाओ!
14 किन्तु अब सिय्योन ने कहा, “यहोवा ने मुझको त्याग दिया।
15 किन्तु यहोवा कहता है, “क्या कोई स्त्री अपने ही बच्चों को भूल सकती है नहीं!
16 देखो जरा, मैंने अपनी हथेली पर तेरा नाम खोद लिया है।
17 तेरी सन्तानें तेरे पास लौट आयेंगी।
18 ऊपर दृष्टि करो, तुम चारों ओर देखो! तेरी सन्तानें सब आपस में इकट्ठी होकर तेरे पास आ रही हैं।
19 आज तू नष्ट है और आज तू पराजित है।
20 जो बच्चे तूने खो दिये, उनके लिये तुझे बहुत दु:ख हुआ किन्तु वही बच्चे तुझसे कहेंगे।
21 फिर तू स्वयं अपने आप से कहेगा,
22 मेरा स्वामी यहोवा कहता है,
23 राजा तेरे बच्चों के शिक्षक होंगे और राजकन्याएँ उनका ध्यान रखेंगी।
24 जब कोई शक्तिशाली योद्धा युद्ध में जीतता है तो क्या कोई उसकी जीती हुई वस्तुओं को उससे ले सकता है जब कोई विजेता सैनिक किसी बन्दी पर पहरा देता है, तो क्या कोई पराजित बन्दी बचकर भाग सकता है
25 किन्तु यहोवा कहता है, “उस बलवान सैनिक से बन्दियों को छुड़ा लिया जायेगा और जीत की वस्तुएँ उससे छीन ली जायेंगी।
26 ऐसे उन लोगों को जो तुम्हें कष्ट देते हैं मैं ऐसा कर दूँगा कि वे आपस में एक दूसरे के शरीरों को खायें। उनका खून दाखमधु बन जायेगा जिससे वे धुत्त होंगे।