1 उस समय, यहूदा के लोग यह गीत गायेंगे:
2 उसके द्वारों को खोलो ताकि भले लोग उसमें प्रवेश करें।
3 हे यहोवा, तू हमें सच्ची शांति प्रदान करता है।
4 अत: सदैव यहोवा पर विश्वास करो।
5 किन्तु अभिमानी नगर को यहोवा ने झुकाया है
6 तब दीन और नम्र लोग नगरी के खण्डहरों को अपने पैर तले रौंदेंगे।
7 खरापन खरे लोगों के जीने का ढंग है।
8 किन्तु हे परमेश्वर! हम तेरे न्याय के मार्ग की बाट जोह रहे हैं।
9 मेरा मन रात भर तेरे साथ रहना चाहता है और मेरे अन्दर की आत्मा हर नये दिन की प्रात:
10 यदि तुम केवल दुष्ट पर दया दिखाते रहो तो वह कभी भी अच्छे कर्म करना नहीं सीखेगा।
11 हे यहोवा तू उन्हें दण्ड देने को तत्पर है किन्तु वे इसे नहीं देखते।
12 हे यहोवा, हमको सफलता तेरे ही कारण मिली है।
13 हे यहोवा, तू हमारा परमेश्वर है
14 अब वे पहले स्वामी जीवित नहीं हैं।
15 हे यहोवा, तूने जाति को बढ़ाया।
16 हे यहोवा, तुझे लोग दु:ख में याद करते हैं,
17 हे यहोवा, हम तेरे कारण ऐसे होते हैं
18 इसी तरह हम भी गर्भवान होकर पीड़ा भोगतेहैं।
19 यहोवा कहता है,
20 हे मेरे लोगों, तुम अपने कोठरियों में जाओ।
21 यहोवा अपने स्थान को तजेगा