Apocalipse 19

HIN2010

1 इसके पश्चात् मैंने भीड़ का सा एक ऊँचा स्वर सुना। लोग कह रहे थे:

2 उसके न्याय सदा सच्चे हैं, धर्म युक्त हैं,

3 उन्होंने यह फिर गाया:

4 फिर चौबीसों प्राचीनों और चारों प्राणियों ने सिंहासन पर विराजमान परमेश्वर को झुक कर प्रणाम किया और उसकी उपासना करते हुए गाने लगे:

5 स्वर्ग से फिर एक आवाज़ आयी जो कह रही थी:

6 फिर मैंने एक बड़े जनसमुद्र का सा शब्द सुना जो एक विशाल जलप्रवाह और मेघों के शक्तिशाली गर्जन-तर्जन जैसा था। लोग गा रहे थे:

7 सो आओ, खुश हो-हो कर आनन्द मनाएँ आओ, उसको महिमा देवें!

8 उसको अनुमति मिली स्वच्छ धवल

9 फिर वह मुझसे कहने लगा, “लिखो वे धन्य हैं जिन्हें इस विवाह भोज में बुलाया गया है।” उसने फिर कहा, “ये परमेश्वर के सत्य वचन हैं।”

10 और मैं उसकी उपासना करने के लिए उसके चरणों में गिर पड़ा। किन्तु वह मुझसे बोला, “सावधान! ऐसा मत कर। मैं तो तेरे और तेरे बधुंओं के साथ परमेश्वर का संगी सेवक हूँ जिन पर यीशु के द्वारा साक्षी दिए गए सन्देश के प्रचार का दायित्व है। परमेश्वर की उपासना कर क्योंकि यीशु के द्वारा प्रमाणित सन्देश इस बात का प्रमाण है कि उनमें एक नबी की आत्मा है।”

11 फिर मैंने स्वर्ग को खुलते देखा और वहाँ मेरे सामने एक सफेद घोड़ा था। घोड़े का सवार विश्वसनीय और सत्य कहलाता था क्योंकि न्याय के साथ वह निर्णय करता है और युद्ध करता है।

12 उसकी आँखें ऐसी थीं मानों अग्नि की लपट हो। उसके सिर पर बहुत से मुकुट थे। उस पर एक नाम लिखा था, जिसे उसके अतिरिक्त कोई और नहीं जानता।

13 उसने ऐसा वस्त्र पहना था जिसे लहू में डुबाया गया था। उसे नाम दिया गया था, “परमेश्वर का वचन।”

14 सफेद घोड़ों पर बैठी स्वर्ग की सेनाएँ उसके पीछे पीछे चल रही थीं। उन्होंने शुद्ध श्वेत मलमल के वस्त्र पहने थे।

15 अधर्मियों पर प्रहार करने के लिए उसके मुख से एक तेज धार की तलवार बाहर निकल रही थी। वह उन पर लोहे के दण्ड से शासन करेगा और सर्वशक्ति सम्पन्न परमेश्वर के प्रचण्ड क्रोध की धानी में वह अंगूरों का रस निचोड़ेगा।

16 उसके वस्त्र तथा उसकी जाँघ पर लिखा था:

17 इसके बाद मैंने देखा कि सूर्य के ऊपर एक स्वर्गदूत खड़ा है। उसने ऊँचे आकाश में उड़ने वाले सभी पक्षियों से ऊँचे स्वर में कहा, “आओ, परमेश्वर के महाभोज के लिए एकत्र हो जाओ,

18 ताकि तुम शासकों, सेनापतियों, प्रसिद्ध पुरुषों, घोड़ों और उनके सवारों का माँस खा सको। और सभी लोगों स्वतन्त्र व्यक्तियों, सेवकों छोटे लोगों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों की देहों को खा सको।”

19 फिर मैंने उस पशु को और धरती के राजाओं को देखा। उनके साथ उनकी सेना थी। वे उस घुड़सवार और उसकी सेना से युद्ध करने के लिए एक साथ आ जुटे थे।

20 पशु को घेर लिया गया था। उसके साथ वह झूठा नबी भी था जो उसके सामने चमत्कार दिखाया करता था और उनको छला करता था जिन पर उस पशु की छाप लगी थी और जो उसकी मूर्ति की उपासना किया करते थे। उस पशु और झूठे नबी दोनों को ही जलते गंधक की भभकती झील में जीवित ही डाल दिया गया था।

21 घोड़े के सवार के मुख से जो तलवार निकल रही थी, बाकी के सैनिक उससे मार डाले गए फिर पक्षियों ने उनके शवों के माँस को भर पेट खाया।

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