Hebreus 4

MAI

1 परमेश्‍वर अपना विश्राम मे प्रवेश करयबाक वचन जे अपना लोक केँ देलनि, से एखनो कायम अछि। तेँ अपना सभ सावधान रही, कहीं एना नहि होअय जे अहाँ सभ मे सँ केओ एहि सँ वंचित भऽ जाइ,

2 कारण, जहिना ओकरा सभ केँ शुभ समाचार सुनाओल गेल छलैक तहिना अपनो सभ केँ सुनाओल गेल अछि, मुदा ओहि सुनाओल वचन सँ ओकरा सभ केँ कोनो लाभ नहि भेलैक, कारण, ओ सभ सुनि कऽ तकरा विश्‍वासक संग स्‍वीकार नहि कयलक।

3 आब अपना सभ विश्‍वास करबाक कारणेँ एहि विश्राम मे प्रवेश कयनिहार छी। अविश्‍वासी पूर्वज सभक सम्‍बन्‍ध मे परमेश्‍वर ई कहलनि,

4 जेना कतौ धर्मशास्‍त्र मे सातम दिनक विषय मे हुनकर ई कथन छनि जे,

5 और फेर, जेना ऊपर लिखल अछि, ओ कहैत छथि,

6 जे सभ पहिने शुभ समाचार सुनने छल से सभ एहि विश्राम मे प्रवेश नहि कऽ सकल, कारण ओ सभ आज्ञा नहि मानलक। मुदा ई निश्‍चित अछि जे किछु लोक एहि विश्राम मे सहभागी होयबे करत।

7 तेँ परमेश्‍वर अपना विश्राम मे सहभागी होयबाक एक आओर समय निश्‍चित कयलनि, जकरा ओ “आइ” कहैत छथि, कारण ओ बहुत वर्ष बितला पर राजा दाऊद द्वारा ई कहैत छथि, जकर चर्चा ऊपरो कयल गेल अछि,

8 कारण, जँ यहोशू द्वारा ओकरा सभ केँ विश्राम भेटल रहितैक तँ परमेश्‍वर तकरा बाद फेर राजा दाऊद द्वारा दोसर दिनक चर्चा नहि कयने रहितथि।

9 तेँ परमेश्‍वरक प्रजाक लेल परमेश्‍वरक सातम दिनक विश्राम जकाँ एकटा विशेष विश्राम एखनो बाँकी अछि।

10 कारण, जे केओ परमेश्‍वरक विश्राम मे प्रवेश कऽ लेने अछि सेहो अपन सभ काज सँ विश्राम करैत अछि जेना परमेश्‍वर अपन सभ काज सँ कयलनि।

11 तेँ अपनो सभ ओहि विश्राम मे सहभागी होयबाक लेल प्रयत्‍नशील रही जाहि सँ एना नहि होअय जे ओकरे सभ जकाँ आज्ञा नहि मानबाक कारणेँ ककरो पतन भऽ जाइक।

12 कारण, परमेश्‍वरक वचन जीवित आ फलदायक अछि आ कोनो दूधारी तरुआरिओ सँ तेज अछि। ओ प्राण आ आत्‍मा, जोड़-जोड़ आ हड्डीक भीतरका गुद्दी मे छेदि कऽ ओकरा अलग-अलग कऽ दैत अछि और मोनक विचार आ भावनाक जाँच करैत अछि।

13 सम्‍पूर्ण सृष्‍टि मे कोनो वस्‍तु परमेश्‍वरक दृष्‍टि सँ नुकायल नहि अछि। जिनका लग अपना सभ केँ अपन लेखा-जोखा देबाक अछि तिनका दृष्‍टि मे सभ वस्‍तु खुलल अछि, किछु झाँपल नहि अछि।

14 अपना सभ केँ जखन एतेक पैघ महापुरोहित छथि, अर्थात् परमेश्‍वरक पुत्र यीशु, जे आकाश केँ पार कऽ स्‍वर्ग मे गेल छथि, तँ अबैत जाउ, आ जाहि विश्‍वास केँ खुलि कऽ स्‍वीकार करैत छी, तकरा दृढ़ता सँ पकड़ने रही।

15 किएक तँ अपना सभक महापुरोहित एहन नहि छथि जे अपना सभक कमजोरी मे अपना सभक संग सहानुभूति नहि राखि सकथि। ओहो सभ बात मे अपने सभ जकाँ शैतान द्वारा जाँचल गेलाह, मुदा ओ पाप नहि कयलनि।

16 तेँ अपना सभ निर्भयतापूर्बक परमेश्‍वरक सिंहासन लग, जतऽ कृपा कयल जाइत अछि, ततऽ चलू, जाहि सँ अपना सभ पर दया कयल जाय आ अपना सभ ओ कृपा पाबी जे अपना सभक आवश्‍यकताक समय मे सहायता करत।

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