Apocalipse 18

MAI

1 तकरबाद हम एक आओर स्‍वर्गदूत केँ स्‍वर्ग सँ उतरैत देखलहुँ। हुनका लग पैघ अधिकार छलनि आ हुनकर तेज सँ धरती प्रकाशित भऽ गेल।

2 ओ ऊँच स्‍वर मे बजलाह,

3 किएक तँ सभ जातिक लोक ओकर कुकर्मक काम-वासना वला मदिरा पिने अछि,

4 हमरा स्‍वर्ग सँ फेर एक दोसर आवाज ई कहैत सुनाइ देलक,

5 किएक तँ ओकर पापक ढेरी स्‍वर्ग तक पहुँचि गेल अछि

6 जहिना ओ अनका संग कयने अछि, तहिना तोँहूँ सभ ओकरा संग करह।

7 ओ जतबा अपन बड़ाइ कयलक आ सुख-विलास कयलक

8 एहि कारणेँ एके दिन मे ओकरा पर ई सभटा विपत्ति औतैक—

9 “पृथ्‍वीक राजा, जे सभ ओकरा संग कुकर्म कयलक आ ओकरा संग भोग-विलासक जीवन व्‍यतीत कयलक, से सभ जखन ओकर जरबाक धुआँ देखत तँ ओकरा लेल कानत आ शोक करत।

10 ओकरा पीड़ा केँ देखि कऽ ओ सभ भयभीत भऽ जायत आ दूरे सँ ठाढ़ भऽ कऽ कहत,

11 पृथ्‍वीक व्‍यापारी सभ ओकरा लेल कानत आ शोक करत, किएक तँ आब ओकरा सभक माल केओ नहि किनतैक—

12 अर्थात् ओकरा सभक सोन, चानी, बहुमूल्‍य पाथर आ मोती; ओकरा सभक नीक मलमल, बैगनी कपड़ा, रेशमी आ लाल वस्‍त्र; अनेक प्रकारक सुगन्‍धित काठ; हाथीक दाँत सँ, बहुमूल्‍य काठ सभ सँ, पित्तरि, लोहा आ संगमरमर सँ बनल हर प्रकारक वस्‍तु;

13 ओकरा सभक दालिचीनी, मसल्‍ला, धूप, इत्र आ सुगन्‍धित तेल; मदिरा, जैतूनक तेल, मैदा आ गहुम; गाय-बड़द आ भेँड़ा, घोड़ा आ रथ; गुलाम—हँ, मनुष्‍यो सभ।

14 ओ सभ कहत, “हे बेबिलोन, जाहि फल प्राप्‍तिक तोँ कामना कयने छलह, से तोरा सँ दूर चल गेलह। तोहर सम्‍पूर्ण वैभव आ तड़क-भड़कक सर्वनाश भऽ गेलह। तोँ ई सभ फेर नहि देखबह।”

15 एहि वस्‍तु सभक व्‍यापारी सभ, जे सभ ओहि नगरक कारणेँ धनवान भऽ गेल छल, से सभ आब ओकर यातना देखि कऽ भयभीत भऽ दूरे सँ ठाढ़ भऽ कानि-कानि कऽ शोक करत,

16 आ कहत,

17 एकर सम्‍पूर्ण वैभव घड़िए भरि मे माटि मे मिलि गेलैक!”

18 आ ओकर जरबाक धुआँ देखि कऽ चिचिया उठत जे, “एहि महानगर जकाँ और कोन नगर छल?”

19 ओ सभ अपना मूड़ी पर गर्दा राखत आ कन्‍ना-रोहटि करैत कहत,

20 “हे स्‍वर्ग, ओकर पराजय सँ आनन्‍द मनाउ!

21 तखन एक बलवान स्‍वर्गदूत जाँतक चक्‍की सन एक विशाल पाथर उठौलनि आ समुद्र मे फेकैत कहलनि,

22 वीणा बजौनिहारक, गबैयाक, बाँसुरी बजौनिहारक आ धुतहू फुकऽ वला सभक आवाज

23 डिबियाक प्रकाश तोरा मे फेर

24 ओकरा मे प्रभुक प्रवक्‍ता सभ आ पवित्र लोक सभक खून पाओल गेल,

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