1 ई बात एकदम सत्य अछि जे जँ केओ मण्डली मे जिम्मेवार बनबाक इच्छा करैत छथि तँ ओ एक उत्तम काज करऽ चाहैत छथि।
2 तेँ ई आवश्यक अछि जे जिम्मेवार लोक निष्कलंक होथि, हुनका एकेटा स्त्री होनि, ओ संयमी, विचारवान, भद्र, अतिथि-सत्कार कयनिहार और शिक्षा देबऽ मे निपुण होथि।
3 ओ शराबी नहि होथि, आ मारा-मारी करऽ वला नहि, बल्कि नम्र होथि। ओ झगड़ा कयनिहार वा धनक लोभी नहि होथि।
4 ओ अपन घर-व्यवहार केँ नीक सँ चलबैत अपन बाल-बच्चा केँ कहल मे रखैत होथि, और बच्चा सभ हुनका आदर दैत होनि।
5 कारण, जँ केओ अपने घर-व्यवहार केँ ठीक सँ चलाबऽ नहि जनैत अछि, तँ ओ परमेश्वरक मण्डलीक देख-रेख कोना कऽ सकत?
6 मण्डलीक जिम्मेवार व्यक्ति नव विश्वासी नहि होथि, नहि तँ कतौ एना नहि होअय जे ओ घमण्ड सँ फुलि कऽ ओहिना दण्ड पयबाक भागी बनि जाथि जेना शैतान बनल।
7 इहो आवश्यक अछि जे ओ बाहरी लोक, अर्थात् अविश्वासी सभक मध्य सम्मानित होथि। कतौ एना नहि भऽ जाय जे ओ अपयशक पात्र बनि शैतानक जाल मे पड़थि।
8 तहिना मण्डली-सेवक सभ सेहो नीक चरित्रक होथि; ओ सभ दुमुहा, शराबी, वा अनुचित लाभ कमयबाक इच्छुक नहि होथि।
9 परमेश्वर द्वारा प्रगट कयल सत्य जाहि पर अपना सभक विश्वास आधारित अछि, तकरा ओ सभ शुद्ध आ निर्दोष मोन सँ मानैत होथि।
10 पहिने हुनका सभक जाँच कयल जानि आ हुनका सभक विरोध मे जँ कोनो बात नहि पाओल जाय, तखन मण्डली-सेवकक रूप मे काज करथि।
11 एहि तरहेँ हुनका सभक स्त्री लोकनि सेहो सभ्य आचरणवाली होथि, दोसराक निन्दा-शिकायत करऽ वाली नहि, बल्कि संयमी और सभ बात मे विश्वासयोग्य होथि।
12 मण्डली-सेवक सभ एकेटा स्त्रीक पति होथि, और अपन बाल-बच्चा आ घर-व्यवहार केँ नीक सँ चलबैत होथि।
13 मण्डली-सेवक बनि जे सेवक सभ अपन सेवाक काज ढंग सँ पूरा करैत छथि, से सभ सम्मान पौताह आ मसीह यीशु परक जे हुनका सभक विश्वास छनि, ताहि विषय मे निर्भयतापूर्बक बजबाक साहस सेहो बढ़तनि।
14 हमरा आशा अछि जे हम जल्दी अहाँ लग आयब, मुदा ई पत्र एहि लेल लिखैत छी जे,
15 जँ हमरा अयबा मे विलम्ब भऽ जाय, तँ अहाँ एहि बात केँ जानि ली जे परमेश्वरक परिवार मे लोकक चालि-चलन केहन रहबाक चाही। परमेश्वरक परिवार जे अछि, से जीवित परमेश्वरक मण्डलिए अछि। वैह सत्यक खाम्ह आ न्यो अछि।
16 एहि बात मे सन्देह नहि जे, परमेश्वर द्वारा प्रगट कयल सत्यक रहस्य महान् अछि—