Salmos 78

HNE

1 हे मोर मनखेमन, मोर सिकछा ऊपर धियान देवव;

2 मेंह अपन बात एक पटंतर म करहूं;

3 ओ बात जेला हमन सुने हन अऊ जान ले हन,

4 यहोवा के परसंसा के काम,

5 ओह याकूब बर बिधिमन ला ठहिराईस

6 ताकि अवइया पीढ़ी के मनखेमन ओला जानंय,

7 तब ओमन परमेसर ऊपर अपन भरोसा रखहीं

8 ओमन अपन पुरखामन सहीं नइं होहीं—

9 एपरैम के मनखेमन हालाकि धनुस धरे रिहिन,

10 ओमन परमेसर के करार ला नइं मानिन

11 ओमन भुला गीन कि परमेसर ह ओमन बर का करे रिहिस,

12 ओह ओमन के पुरखामन के आघू म मिसर देस के

13 ओह समुंदर ला दू भाग करके ओमन ला उहां ले निकाले रिहिस;

14 ओह दिन के समय बादर के दुवारा

15 ओह उजाड़ जगह म पथरामन ला फोरके

16 ओह उबड़-खाबड़ चट्टान म ले पानी के धारा निकालिस

17 पर ओमन निरजन जगह म सर्वोच्च परमेसर के बिरूध बिदरोह करत

18 ओमन लालायित होके जेवन मांगे के दुवारा

19 ओमन परमेसर के बिरूध गोठियाईन;

20 सही म, ओह चट्टान ला मारिस,

21 जब यहोवा ह ओमन के बात ला सुनिस, त ओह बहुंत नराज होईस;

22 काबरकि ओमन परमेसर ऊपर बिसवास नइं करिन,

23 तभो ले ओह ऊपर अकास ला हुकूम दीस

24 ओह मनखेमन के खाय बर मन्ना के बारिस करिस,

25 मनखेमन स्वरगदूतमन के रोटी खावत रिहिन;

26 ओह अकास ले पूरबी हवा चलाईस

27 ओह ओमन बर धुर्रा के सहीं मांस के बारिस करिस,

28 ओह ओ चिरईमन ला ओमन के तम्बू के चारों कोति

29 ओमन गला के आवत तक खाईन—

30 पर येकर पहिले कि ओमन अपन लालसा करे चीज ले फिरतिन,

31 कि परमेसर के कोरोध ह ओमन के बिरूध भड़किस;

32 अतेक होय के बाद घलो ओमन पाप करते रिहिन;

33 एकरसेति ओह ओमन के जिनगी के दिनमन ला बेकार म

34 जब भी परमेसर ह ओमन के हतिया करय, ओमन ओकर खोज करंय;

35 ओमन सुरता करंय कि परमेसर ह ओमन के चट्टान ए,

36 पर तब ओमन अपन मुहूं ले ओकर चापलूसी करंय,

37 ओमन के मन ह ओकर बर ईमानदार नइं रिहिस,

38 तभो ले ओह ओमन ऊपर दया करिस;

39 ओह सुरता रखिस कि ओमन सिरिप हाड़-मांस के मनखे अंय,

40 निरजन जगह म ओमन ओकर बिरूध कतेक बार ले बिदरोह करिन

41 बार-बार ओमन परमेसर ला परखिन;

42 ओमन ओकर सामर्थ ला सुरता नइं करिन—

43 ओ दिन जब ओह मिसर देस म अपन चिनहां,

44 ओह मिसरीमन के नदी के पानी ला खून म बदल दीस;

45 ओह ओमन ऊपर मधुमक्खीमन के झुंड पठोईस, जेमन ओमन ला खा गीन,

46 ओह ओमन के फसल ला कीरामन ला,

47 ओह ओमन के अंगूर के नारमन ला करा गिराके

48 ओह ओमन के पालतू पसुमन ला करा गिराके,

49 ओह ओमन के बिरूध अपन भारी गुस्सा,

50 ओह अपन कोरोध बर एक रसता तियार करिस;

51 ओह मिसर देस के जम्मो पहिलांतमन ला मार डारिस,

52 पर ओह अपन मनखेमन ला पसुमन के झुंड सहीं बाहिर निकालिस;

53 ओह ओमन ला सुरकछित निकालिस, जेकर ले ओमन निडर रिहिन;

54 अऊ ये किसम ले ओह ओमन ला अपन पबितर देस के सीमना,

55 ओह ओमन के आघू ले जाति-जाति के मनखेमन ला भगा दीस

56 पर ओमन परमेसर के परिछा लीन

57 अपन पुरखामन के सहीं ओमन बिसवासघाती अऊ बेईमान निकलिन,

58 ओमन देवतामन बर ऊंच जगहमन ला बनाके ओला गुस्सा दिलाईन;

59 जब परमेसर ह ओमन के सुनिस, त ओह बहुंत गुस्सा होईस;

60 ओह सीलो सहर के ओ पबितर-तम्बू ला तियाग दीस,

61 ओह अपन ताकत के सन्दूक ला बंधुवई म,

62 ओह अपन मनखेमन ला तलवार ले मरवा दीस;

63 आगी ह ओमन के जवानमन ला भसम कर दीस,

64 ओमन के पुरोहितमन तलवार ले मार डारे गीन,

65 तब परभू ह मानो नींद ले जागिस,

66 ओह अपन बईरीमन ला मार भगाईस;

67 तब ओह यूसुफ के तम्बू ला तियाग दीस,

68 पर ओह यहूदा के गोत्र,

69 ओह अपन पबितर-स्थान ला ऊंचहा जगह सहीं बनाईस,

70 ओह अपन सेवक दाऊद ला चुनिस

71 भेड़ चराय के काम ले दाऊद ला हटाके ओह ले आईस

72 अऊ दाऊद ह पूरा ईमानदारी से ओमन के देखरेख करिस;

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