1 परमेसर ह उठय, ओकर बईरीमन तितिर-बितिर हो जावंय;
2 तें ओमन ला धुआं के सहीं उड़ा दे—
3 पर धरमी जन परमेसर के आघू म
4 परमेसर के गीत गावव, ओकर नांव के परसंसा के गीत गावव,
5 परमेसर ह अपन पबितर निवास म हवय,
6 परमेसर ह अकेला मनखे ला परिवार म बसाथे,
7 हे परमेसर, जब तेंह अपन मनखेमन के आघू ले निकलय,
8 त धरती ह कांपिस, अकास ह बारिस भेजिस,
9 हे परमेसर, तेंह बहुंत बारिस दे हस;
10 तोर मनखेमन येमा बस गे हवंय,
11 परभू ह बचन के घोसना करथे,
12 “राजा अऊ सेनामन जल्दबाजी म भागथें;
13 अऊ त अऊ जब तुमन भेड़साला म सुतथव,
14 जब सर्वसक्तिमान परमेसर ह राजामन ला देस म तितिर-बितिर करिस,
15 बासान पहाड़, सानदार पहाड़,
16 हे उबड़-खाबड़ पहाड़, तेंह ओ पहाड़ ला
17 परमेसर के रथमन बीस हजार
18 जब तेंह ऊंचहा जगह म गय,
19 परभू, परमेसर हमर उद्धारकर्ता के परसंसा होवय,
20 हमर परमेसर ह ओ परमेसर अय, जऊन ह हमन ला बचाथे;
21 खचित परमेसर ह अपन बईरीमन के मुड़ ला कुचरही,
22 परभू ह कहिथे, “मेंह ओमन ला बासान ले लानहूं;
23 कि तें अपन बईरीमन के खून म चलके जा सकस,
24 हे परमेसर, तोर जुलूस ला देखे गे हवय,
25 आघू-आघू गवइयामन अऊ ओमन के पाछू बाजावाले हवंय;
26 बड़े सभा म परमेसर के परसंसा करव;
27 बिनयामीन के छोटे गोत्र ह ओमन के अगुवई करत हे,
28 हे परमेसर, अपन सामर्थ ला देखा;
29 यरूसलेम म तोर मंदिर के कारन
30 नरकट म रहत जंगली पसुमन ला,
31 दूतमन मिसर देस ले आहीं;
32 हे धरती के राजमन, परमेसर के गीत गावव,
33 ओकर परसंसा करव, जऊन ह सनातन स्वरग, सबले ऊंच स्वरग म सवारी करथे,
34 परमेसर के सामर्थ के घोसना करव,
35 हे परमेसर, तेंह अपन पबितर-स्थान म अद्भूत अस;