1 सक्तिसाली परमेसर, यहोवा ह
2 सियोन ले, जेह अब्बड़ सुघर हे,
3 हमर परमेसर ह आथे
4 ओह अपन मनखेमन के नियाय करे बर
5 “ये मोर भक्तमन ला मोर करा इकट्ठा करव,
6 अऊ स्वरग ह ओकर धरमीपन के घोसना करत हे,
7 “हे मोर मनखेमन, सुनव, अऊ मेंह गोठियाहूं;
8 मेंह तोर बलिदान के बारे म या ओ होम-बलिदान के बारे म
9 मोला तोर घर ले बईला
10 काबरकि जंगल के हर एक पसु मोर अय,
11 मेंह पहाड़मन के जम्मो चिरईमन ला जानथंव,
12 यदि मेंह भूखा होतेंव, त मेंह तोला नइं कहितेंव,
13 का मेंह सांड़मन के मांस खाथंव
14 “परमेसर ला धनबाद रूपी भेंट चघा,
15 संकट के बेरा म मोला पुकार;
16 पर दुस्ट मनखे ला परमेसर ह कहिथे:
17 तेंह तो मोर सिकछा ले घिन करथस
18 जब तेंह कोनो चोर ला देखथस, त ओकर संग सामिल हो जाथस;
19 तोर मुहूं ले बुरई के बात निकलथे
20 तेंह बईठके अपन भाई के बिरूध गोठियाथस
21 जब तेंह ये काममन ला करय अऊ मेंह चुप रहेंव,
22 “तुमन, जेमन परमेसर ला भुला जाथव, येकर बारे म बिचार करव,
23 जऊन मन मोला धनबाद-बलिदान चघाथें, ओमन मोर आदर करथें,