1 परमेसर ह हमर सरन-स्थान अऊ बल अय,
2 एकरसेति हमन नइं डरन, चाहे धरती ह पलट जावय
3 चाहे समुंदर के पानी ह गरजय अऊ ओमा ले फेन निकलय
4 एक नदी हवय, जेकर जल-धारामन परमेसर के सहर ला खुस कर देथें,
5 परमेसर ह ओ नगर म हवय, ओ नगर ह नइं गिरय;
6 जाति-जाति के मनखेमन के बीच खलबली मचे हवय, कतको राजमन गिर जावत हें;
7 यहोवा सर्वसक्तिमान ह हमर संग हवय;
8 आवव अऊ यहोवा के काम ला देखव
9 ओह धरती के छोर तक
10 ओह कहिथे, “सांत रहव, अऊ ये बात ला जान लव कि मेंह परमेसर अंव;
11 यहोवा सर्वसक्तिमान ह हमर संग हवय;