1 मेंह ओमन के संग आनंद मनाथंव, जऊन मन मोला कहिन,
2 हे यरूसलेम, तोर दुवारमन म
3 यरूसलेम ला ओ सहर के सहीं बनाय गे हवय,
4 ओही ह ओ जगह ए, जिहां गोत्र-गोत्र के मनखे—
5 उहां नियाय बर सिंघासनमन हवंय,
6 यरूसलेम के सांति बर पराथना करव:
7 तोर दीवारमन के भीतर म सांति
8 अपन परिवार अऊ संगवारीमन के हित म,
9 यहोवा, हमर परमेसर के घर के हित म