1 यहोवा के परसंसा करव।
2 ओमन के लइकामन देस म सक्तिसाली होहीं;
3 ओमन के घर म धन अऊ सम्पन्नता होही,
4 ईमानदार मनखे बर अंधियार म घलो अंजोर निकलथे,
5 ओमन के भलई होही, जऊन मन उदार मन के अंय अऊ खुले मन से उधार देथें,
6 खचित धरमी ह कभू नइं डगमगाही;
7 ओमन खराप संदेस सुनके भयभीत नइं होहीं;
8 ओमन के हिरदय ह सुरकछित हवय, ओमन ला कोनो किसम के भय नइं होवय;
9 ओमन गरीबमन ला दिल खोलके दान दे हवंय,
10 दुस्टमन येला देखके कुढ़हीं,