1 हे परमेसर, मोर मन ह अटल हवय;
2 हे बीना अऊ सारंगी, जागव!
3 हे यहोवा, मेंह जाति-जाति के मनखेमन के बीच म तोर परसंसा करहूं;
4 काबरकि तोर मया ह अतेक महान ए कि ओह स्वरग ले घलो ऊंच हवय;
5 हे परमेसर, तोर महिमा ह स्वरगमन ले घलो ऊपर होवय;
6 अपन जेवनी हांथ उठाके हमन ला बचा अऊ हमर मदद कर,
7 परमेसर ह अपन पबितर-स्थान ले कहे हवय:
8 गिलाद ह मोर ए, मनस्से ह घलो मोर ए;
9 मोआब ह मोर हांथ-मुहूं धोए के बरतन ए,
10 कोन ह मोला गढ़वाले सहर म लानही?
11 हे परमेसर, का ये तें नो हस, तें जऊन ह हमन ला अस्वीकार करे हस
12 बईरीमन के बिरूध हमर मदद कर,
13 परमेसर के मदद ले ही हमन बिजयी होबो,