1 “अपन भाईमन ले कहव, ‘मोर मनखे,’ अऊ अपन बहिनीमन ले कहव, ‘मोर मयारू।’
2 “अपन दाई ला दबकार, ओला दबकार,
3 नइं तो मेंह ओकर ओनहा ला उतारके अइसने नंगरी कर दूहूं
4 ओकर लइकामन बर मेंह अपन मया नइं देखाहूं,
5 ओमन के दाई ह छिनारी करे हवय
6 एकरसेति, मेंह ओकर रद्दा ला कंटिली झाड़ीमन ले घेर दूहूं,
7 ओह अपन मया करइयामन के पीछा करही पर ओमन ला पकड़ नइं सकही;
8 ओह ये बात ला नइं माने हे कि ओह मेंहीच रहेंव
9 “एकरसेति मेंह अपन अनाज ला ले लूहूं जब ओह पाक जाही,
10 एकरसेति अब मेंह ओकर फूहड़पन ला
11 मेंह ओकर जम्मो उत्सव मनई ला बंद कर दूहूं:
12 मेंह ओकर अंगूर के नार अऊ ओकर अंजीर के रूखमन ला बरबाद कर दूहूं
13 मेंह ओला ओ बातमन बर सजा दूहूं
14 “एकरसेति, अब मेंह ओला ललचाहूं;
15 उहां मेंह ओला ओकर अंगूर के बारीमन ला लहुंटा दूहूं,
16 यहोवा ह घोसना करत हे,
17 मेंह ओकर मुहूं ले बाल देवतामन के नांव ला मिटा दूहूं;
18 ओ दिन मेंह ओमन बर
19 मेंह तोला हमेसा के खातिर बिहाव के बचन दूहूं;
20 में तोला सच्चई के संग बिहाव के बचन दूहूं,
21 यहोवा ह घोसना करत हे—
22 अऊ धरती ह अनाज,
23 मेंह ओला अपन बर देस म लगाहूं;