1 तब अयूब ह जबाब दीस:
2 “आज घलो मोर सिकायत ह करू अय;
3 कहूं मेंह सिरिप ये जानतेंव कि ओह कहां मिलही;
4 मेंह अपन मामला ओकर आघू म रखतेंव
5 मेंह पता लगातेंव कि ओह मोला का जबाब देतिस,
6 का ओह अपन पूरा बल ले मोर संग बहस करही?
7 उहां ईमानदार मनखे ह ओकर आघू म अपन निरदोस होय के बात ला साबित कर सकथे,
8 “पर कहूं मेंह पूरब दिग म जावंव, त ओह उहां नइं ए;
9 जब ओह उत्तर दिग म काम करत रहिथे, त मेंह ओला नइं देखंव;
10 पर ओह जानथे कि मेंह कते रद्दा म जावत हंव;
11 मेंह बहुंत नजदीकी ले ओकर पाछू म चले हंव;
12 मेंह ओकर दिये मुहूं के हुकूम ले नइं हटे हंव;
13 “पर ओह अपन बात म अडिग रहिथे, अऊ कोन ह ओकर बिरोध कर सकथे?
14 ओह मोर बिरोध म अपन फैसला लेथे,
15 येकरे कारन मेंह ओकर आघू म भयभीत हंव;
16 परमेसर ह मोर मन ला हतास कर दे हवय;
17 तभो ले मेंह अंधियार के कारन चुप नइं अंव,